जब भी जाए भगवान शिव की नगरी ना भुलें ये इऩ जगहों पर जाना...

medhaj news 17 Apr 17,22:57:07 Tour
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भगवान शिव की नगरी काशी को भारत का सबसे पुराना व पवित्र शहर माना जाता है। यह शहर अपनी पौराणिक और धार्मिक मान्याताओं के चलते ही पूरी दुनिया में मशहूर है। वाराणसी में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हुए हैं। शिव के नगरी काशी में लगभग सभी 84 घाटों में शिव स्वंय विराजमान हैं। इन सभी घाटों सो कोई ना कोई पौराणिक और धार्मिक कथाएं जुड़ी हुई है।

अगर आप भी वाराणसी घाट जाने का प्लान बना रहे हैं तो कुछ ऐसी जगह है जहां घुमें बिना आपकी यह यात्रा अधुरी सी रह जाएगी। तो चलिए जानते है उन जगहों के बारें में-

-दशाश्वमेध घाट

दशाश्वमेध घाट वाराणसी के गंगा नदी के किनारे स्थित सभी घाटों में सबसे प्राचीन और शानदार घाट है। दशाश्वमेध का अर्थ होता है दस घोड़ों का बलिदान। मान्यता है कि हजारों साल पुराने इस घाट पर भगवान ब्रह्मा ने भगवान शिव को निर्वासन से वापस बुलाने के लिए यहां एक यज्ञ का आयोजन किया था।

हालांकि यह बात स्पष्ट नहीं है कि इस यज्ञ में भगवान शिव को बुलाने के लिए दस घोड़ों की बलि दी गई थी या उनके आने की खुशी में दस घोड़ों की बलि दी गई थी। इसलिए इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए ही इस घाट का वाराणसी का सबसे प्रमुख घाट माना जाता है।

 -काशी विश्वनाथ मंदिर

पिछले कई हजार सालों से वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्ट स्थान है।

-रामनगर किला

रामनगर वाराणसी जिला का एक तहसील है जहां एक किला स्थित है। इस किले को रामनगर किला कहा जाता है और ये यहां के राजा काशी नरेश का आधिकारिक और पैतृक आवास है।

इस किले में यहां के राजाओं का एक संग्रहालय भी है, इस किले को देखने के लिए हर रोज पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस किले में रखी तोप, चांदी का सिंहासन और कई ऐसी चीजे हैं जो अंग्रेजों के समय की याद दिलाती है।

-चौखंडी स्तूप

वाराणसी से करीब 13 किलोमीटर दूर सारनाथ में स्थित चौखंडी स्तूप बौद्ध समुदाय के लिए पूजनीय स्थल है। यहां गौतम बुद्ध से जुड़ी कई निशानियां आज भी मौजूद हैं।

ऐसा माना जाता है कि बोधगया से सारनाथ जाने के क्रम में गौतम बुद्ध इसी जगह पर अपने पहले शिष्य से मिले थे। ऐसी मान्यता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो भी श्रद्धालु वाराणसी जाता है वो काशी विश्वनाथ मंदिर में भोलेबाबा का आशीर्वाद लेने जरूर पहुंचता है।

 

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