चीन के इस सुझाव पर मोदी सरकार के साथ खड़ी हुई कांग्रेस

medhaj news 20 Jun 18,18:07:54 Trends
modi_china.jpeg

चीन के राजदूत लुओ झाओहुई ने भारत और पाकिस्‍तान के संबंधों को सुधारने के लिए एक सुझाव दिया है, जिसकी कांग्रेस पार्टी ने आलोचना की है। इतना ही नहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर मोदी सरकार के साथ खड़ी नजर आ रही है। दरअसलवुहान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात से बदले माहौल के बाद चीन ने साफ तौर पर संकेत दिया है कि भारत उसके साथ मौजूदा हर तनाव को दूर करने के लिए आगे आए। भारत में चीन के राजदूत लुओ झाओहुई ने कहा है कि दोनो देशों के रिश्ते दूसरे डोकलाम जैसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं कर सकते। ऐसे में सीमा विवाद जैसे मामलों के ऐसे समाधान निकालने की कोशिश होनी चाहिए जो दोनों पक्षों को स्वीकार हों। झाओहुई ने दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत की शुरुआत करने और चीन, भारत व पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय सहयोग शुरू करने का भी आह्वान किया।

चीनी राजदूत की तरफ से इस तरह से खुलकर बयान देने की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में झाओहुई की तरफ से आए प्रस्ताव को कूटनीतिक सर्किल में चीन की सरकार का प्रस्ताव ही माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ भारतीय मित्रों ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तहत भारत, चीन व पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय सहयोग शुरू करने की बात कही है जो एक बेहद सकारात्मक सुझाव है। यह संभव है क्योंकि जब रूस, चीन व मंगोलिया के बीच सहयोग हो सकता है तो फिर इन तीनों देशों के बीच क्यों नहीं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभी नहीं, लेकिन बाद में संभव है।

भारत-चीन के भविष्य के रिश्तों की दशा व दिशा तय करने के लिए उन्होंने चार सूत्रीय फॉर्मूला दिया है, जिसमें पहला है दोस्ती व सहयोग पर एक व्यापक समझौता करना। दूसरा सुझाव मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू करने को लेकर है। यह इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि चीन और अमेरिका में अभी कारोबार को लेकर युद्ध चल रहा है। इस बारे में चीन व भारत के विचार एक जैसे हैं। हालांकि चीनी राजदूत जानते हैं कि भारत को इस बारे में कई तरह की आशंकाएं हैं। लिहाजा उन्होंने बताया कि चीन भारत से आयात बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है। भारत व चीन वर्ष 2022 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय कारोबार का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उन्होंने अमेरिका का नाम लिए बगैर कहा कि जिस तरह से बड़ी शक्तियां विकासशील देशों को आर्थिक तौर पर दबाने की कोशिश कर रही हैं उसे देखते हुए भारत व चीन के बीच बड़े सहयोग की संभावनाएं हैं।

भारत-चीन के भविष्य के रिश्तों की दशा व दिशा तय करने के लिए उन्होंने चार सूत्रीय फॉर्मूला दिया है, जिसमें पहला है दोस्ती व सहयोग पर एक व्यापक समझौता करना। दूसरा सुझाव मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू करने को लेकर है। यह इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि चीन और अमेरिका में अभी कारोबार को लेकर युद्ध चल रहा है। इस बारे में चीन व भारत के विचार एक जैसे हैं। हालांकि चीनी राजदूत जानते हैं कि भारत को इस बारे में कई तरह की आशंकाएं हैं। लिहाजा उन्होंने बताया कि चीन भारत से आयात बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है। भारत व चीन वर्ष 2022 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय कारोबार का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उन्होंने अमेरिका का नाम लिए बगैर कहा कि जिस तरह से बड़ी शक्तियां विकासशील देशों को आर्थिक तौर पर दबाने की कोशिश कर रही हैं उसे देखते हुए भारत व चीन के बीच बड़े सहयोग की संभावनाएं हैं।

चीनी राजदूत के बयान पर कांग्रेस का बयान भी सरकार के रुख से मेल खाता है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि पार्टी चीनी राजदूत के त्रिकोणीय सहयोग के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करती है। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। पाकिस्तान के साथ सभी मसलों का समाधान द्विपक्षीय आधार पर ही किया जाना चाहिए।


 

    मेधज न्यूज़ के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक करें। आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं।

    ...
    loading...

    Similar Post You May Like


    Trends

    Special Story