पुत्र की दीर्घायु के लिए माताएं रखती है जितिया व्रत, जानें व्रत का महत्व

medhaj news 14 Sep 17,18:10:20 World
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देशभर की माताओं ने बुधवार से ही अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए निर्जल उपावास रखा। अटूट आस्था और श्रद्धा के साथ पूजन कर कथा सुनकर परिवार और पुत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

इस व्रती में माताएं शाम होते ही नदी, सरोवर या तालाब बाग-बगीचे में फल-फूल और पूजन सामग्री के साथ पूजा करती है।

बता दें, व्रत का प्रसंग सतयुग व द्वापर युग में मिलता है। महाभारत के बाद अश्वत्थामा द्वारा अपना अमोघ अस्त्र अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ पर चलाने व स्थिति को भांपते हुए श्रीकृष्ण ने सूक्ष्म रूप धारण कर उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर शिशु की रक्षा करने से जुड़ा है। रक्षित शिशु आगे चलकर परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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इस पर्व के मद्देनजर महिलाओं ने बुधवार की भोर से ही निर्जला व्रत किया। दोपहर बाद महिलाएं नदी  में स्नान के लिए विभिन्न घाटों पर जाती। स्नान के बाद पूजा-पाठ तथा दान-पुण्य किया जाता है। इसके बाद नदी घाटों, घरों तथा मंदिरों में ब्राह्मण से जिउतिया की कथा सुनी जाती है। इसके बाद पूजा की थाली या पात्र में रखे सोने या चांदी के जिउतिया को महिलाओं ने धारण करती है। जिस महिला के जितने पुत्र होते हैं, वह उतनी संख्या में जिउतिया को धारण करती हैं।

 

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