कंगाली के बेहद निकट है पाकिस्तान, रुपया हुआ तबाह

Medhaj news 11 Oct 18,17:14:16 World
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इमरान खान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पाकिस्तान अपनी आर्थिक हालत को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था डिफॉल्ट के कगार पर खड़ी है और इसे बचाने के लिए वहां की सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है।स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के हवाले से पाक अखबार डॉन ने कहा है कि सरकार फंड के लिए आईएमएफ के पास जाकर रुपये को तबाह कर रही है जिससे देश पर बड़ा अर्थ संकट मंडराने लगा है। जबकि पाक का विदेशी मुद्रा भंडार भी खाली हो रहा है, ऐसे में देश पर दिवालिया होने का खतरा बढ़ चुका है।

पाक में फॉरेक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मलिक बोस्टन ने सरकार को देश के दिवालिया होने के खतरे से सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि पाक रुपये का इसी तरह गिरना जारी रहा तो लोगों की खरीदारी की क्षमता पर डाका पड़ जाएगा और अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होकर दिवालिया हो जाएगी।पाक में विकट हालातों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौजूदा सप्ताह की शुरूआत में ही पाक रुपया एक डॉलर के मुकाबले 10.24 फीसदी गिरावट के साथ 139 रुपये तक कमजोर हो गया। पाक की केंद्रीय बैंक ने यहां तक कहा है कि यह गिरावट देश के चालू खाता घाटा और डॉलर की मांग-आपूर्ति में बढ़ती खाई का खतरनाक नमूना है।

एसबीपी ने कहा है कि देश का व्यापार घाटा बढ़ने के कारण मुद्रा बाजार भी असंतुलित हो चुका है। उधर आईएमएफ ने सलाह दी है कि पाक रुपये को एक डॉलर की तुलना में 150 रु. तक ले जाया जाए। ऐसे में पाक रुपये का अवमूल्यन तय है जो पहले से ही गिर रहा है।ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाक पर विदेशी कर्ज 91.8 अरब डॉलर हो चुका है। यह कर्ज पांच साल पहले नवाज शरीफ के सत्ता संभालने के बाद से 50 फीसदी बढ़ गया है जो देश के लिए खतरनाक संकेत हैं। इसके बावजूद चीन का दो तिहाई कर्ज सात प्रतिशत की ऊंची ब्याज दर पर पाक ने ले लिया है।

पाक को आर्थिक संकट से उबारने के मकसद से इमरान सरकार ने भले ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की शरण में जाकर बेलआउट पैकेज लेने का फैसला किया है लेकिन इस संस्था ने पाक को चेतावनी जारी की है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि पाक ने फिलहाल वित्तीय मदद के लिए औपचारिक संपर्क नहीं किया है लेकिन पाक अर्थव्यवस्था में चीन की भागीदारी बढ़ने से पाक को लाभ के साथ बड़े खतरे भी उठाने पड़ सकते हैं।

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