20 साल में भारत के किसी मंत्री का पहला दौरा,पहुंचे उत्तर कोरिया

medhaj news 17 May 18,16:40:34 World
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केंद्र की राजग सरकार ने हाल के दिनों में एक के बाद एक चौंकाने वाले कूटनीतिक फैसले लेने शुरु किये हैं। पहले चीन के राष्ट्रपति के साथ पीएम नरेंद्र मोदी की अनौपचारिक वार्ता, फिर रूस के राष्ट्रपति के साथ ऐसी ही दूसरी वार्ता का फैसला और अब उत्तर कोरिया के साथ संपर्क साधना। दुनिया भर के कूटनीतिक सर्किल में बेहद मजबूत संकेत देते हुए विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह 15 मई को उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग पहुंच कर वहां के लीडर किम जोंग उन के मंत्रिमंडल के आला अधिकारियों के साथ वार्ता की है।

जनरल सिंह की यह यात्रा सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि भारत व उत्तर कोरिया के बीच दो दशकों के बाद सरकारी स्तर पर बातचीत हुई है, बल्कि इससे कूटनीतिक लिहाज से भारत के बढ़ते आत्मविश्वास का भी पता चलता है।

विदेश मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि उत्तर कोरिया सरकार के अनुरोध पर दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे जनरल सिंह वहां सुप्रीम पीपुल्स एसेंबली के प्रेसिडियम (उत्तर कोरिया में कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्था) के वाइस प्रेसिडेंट किम यांग डाई, विदेश मंत्री री यांग हो, संस्कृति मंत्री पाक चुन नाम, उप विदेश मंत्री चो हुई चोल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच मौजूदा कूटनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक व संस्कृति से जुड़े सहयोग के मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारतीय विदेश राज्य मंत्री को उत्तर कोरिया के मंत्रियों ने मौजूदा शांति वार्ता, हाल ही में दक्षिण कोरिया के साथ हुई वार्ता आदि के बारे में जानकारी दी। भारत की तरफ से परमाणु क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी के गैर-आधिकारिक तौर पर होने वाले लेन-देन के मुद्दे को उठाया।

भारत ने खास तौर पर अपने पड़ोसी देश में परमाणु ऊर्जा से जुड़ी तकनीकी के गैर-कानूनी कारोबार को लेकर अपनी चिंताएं जताई। इसके जवाब में उत्तर कोरिया ने यह आश्वासन दिया कि वह एक मित्र राष्ट्र के तौर पर भारतीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम नहीं उठाएगा।

दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में करीबी सहयोग स्थापित करने को लेकर भी बातचीत हुई है। यह सहमति भी बनी है कि दोनों देशों की आम जनता के बीच ज्यादा करीबी रिश्ते स्थापित किये जाए। योगा और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति क्षेत्र में भारत की तरफ से दी जाने वाली मदद को लेकर भी चर्चा हुई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध के बाद किस तरह से द्विपक्षीय कारोबार को आगे बढ़ाया जाए, इस पर भी चर्चा हुई है।

देश राज्य मंत्री की इस तरह से बगैर किसी प्रचार प्रसार के उत्तर कोरिया पहुंचने के कई मायने निकाले जा रहे है। माना जा रहा है कि जनरल सिंह ने चीन के रास्ते प्योंगयांग जा कर अमेरिका को यह संकेत देने की कोशिश की है कि भारत अपने हितों के मुताबिक ही कूटनीतिक कदम उठाएगा।

सनद रहे कि अक्टूबर, 2017 में जब तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन नई दिल्ली आये थे तब भारत पर यह दबाव बनाया था कि वह उत्तर कोरिया से रिश्ते तोड़ ले और वहां अपने दूतावास को बंद करे। भारत ने इससे इंकार कर दिया था। वर्ष 2016-17 में भारत उत्तर कोरिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश था। दो वर्ष पहले तक भारत उत्तर कोरिया के प्रशासनिक व सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दे रहा था। अब जबकि उत्तर कोरिया से शांति वार्ता चल रही है तो भारत भी यह संदेश दे दिया है कि वह उत्तर कोरिया के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने को उत्सुक है।

एक दूसरी वजह यह है कि भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जब उत्तर कोरिया पर सारे प्रतिबंध हट जाये तब वह पाकिस्तान के साथ गहरे सामरिक रिश्ते स्थापित करने में आगे नहीं बढ़े। माना जाता है कि परमाणु बम से जुड़ी तकनीकी के मामले में उत्तर कोरिया की मदद से ही पाकिस्तान ने परमाणु बम तैयार किया है।

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