इस सरदार ने ट्रंप की सुरक्षा से पहले लड़ी पगड़ी के लिए लड़ाई

Medhaj news 13 Sep 18,17:12:48 World
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चलिए हम आपको अंशदीप सिंह भाटिया से मिलवाते हैं, जो लुधियाना से ताल्लुक रखते हैं। अंशदीप अब दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने इस टीम में शामिल होकर इतिहास रचा है। जी हां, अंशदीप वो पहले सिख हैं, जिन्होंने इस सुरक्षा दस्ते में जगह पाई है। लेकिन उनके लिए यह सब इतना आसान नहीं था। उन्होंने अपनी वेशभूषा में बदलाव ना करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी है।यूएस प्रेसीडेंट के सुरक्षा दस्ते के लिए अंशदीप का चयन व्हाइट हाउस ने पहले ही कर लिया था। लेकिन पगड़ी पहनने की वजह से उन्हें ड्यूटी पर बहाल नहीं किया जा रहा था। अमेरिकी प्रोटोकोल के मुताबिक, राष्ट्रपति के सुरक्षा गार्डों को सामान्य वेशभूषा में ही दिखना चाहिए।

जब अशदीप पर उनकी पगड़ी को लेकर शर्ते रखी गईं, तो उन्होंने वहां की अदालत का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने फैसला उनके पक्ष में सुनाया। अदालत ने उनके अधिकारों का बचाव करते हुए सरकार से अंशदीप को जल्द से जल्द ड्यूटी पर बहाल करने का आदेश दिया। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्‍हें इसी सप्‍ताह एक समारोह में अमेरिकी राष्‍ट्रपति की सुरक्षा के तैनात गार्ड दस्‍ते में शामिल कर लिया गया। साथ ही साथ वह ऐसे पहले सिख भी बन गए हैं, जो पूरी शिनाख्‍त के साथ सुरक्षा फ्लीट में शामिल हुए हैं।

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अंशदीप का परिवार मूलत: कानपुर का रहने वाला है। यहां उनका परिवार बर्रा स्थित केडीए कॉलोनी में रहता था, लेकिन 1984 के सिख दंगों के बाद उन्हें कानपुर से लुधियाना जाना पड़ा।दंगों में अंशदीप के चाचा और एक रिश्तेदार की मौत हो गई थी, जबकि उनके पिता को तीन गोलियां लगी थीं। इस हादसे के बाद बैंक में नौकरी कर रहे अंशदीप के दादाजी अमरीक सिंह भाटिया ने लुधियाना ट्रांसफर ले लिया। इसके बाद 2000 में अंशदीप अपने परिवार के साथ अमेरिका चले गए। तब उनकी उम्र 10 साल थी।

पंजाब के लुधियाना में जन्मे अंशदीप सिंह भाटिया पहले ऐसे सिख बनें हैं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा शामिल किया गया है। अमेरिका में कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अंशदीप सिंह को राष्ट्रपति की सुरक्षा दल में पिछले हफ्ते शामिल किया गया। इस ऊंचाई तक पहुंचने वाले अंशदीप सिंह के परिवार को 1984 के सिख विरोधी दंगे के बाद कानपुर से लुधियाना पलायन करना पड़ा था। दंगे के समय कानुपर के केडीए कॉलोनी स्थित उनके घर पर भीड़ ने हमला कर दिया था।  इस घटना में उनके चाचा और एक नजदीकी रिश्तेदार की मौत हो गई थी। उनके पिता देवेंद्र सिंह भी इस घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे। उनके शरीर पर तीन गोलियों के निशान मिले थे।यह वो समय था, जब उनकी की शादी नवंबर के दूसरे हफ्ते तय थी। पूरा परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था। लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। घटना के बाद उनके दादा अमरीक सिंह भाटिया, जो पंजाब और सिंध बैंक में प्रबंधक थे, ने लुधियाना में पलायन करने का निश्चय किया। उनके पिता, जो कानपुर में फार्मास्यूटिकल बिजनेस में थे, ने लुधियाना में शादी की। 2000 में अपने परिवार के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। उस समय अंशदीप की उम्र मात्र 10 वर्ष थी।अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में शामिल होने से पहले अंशदीप सिंह ने कई जगह नौकरी की। वे पहले एयरपोर्ट सिक्योरिटी में भी रहे। हालांकि, यहां उनका मन नहीं लगा। उनका सपना था कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा में शामिल हो, लेकिन उन्हें तब जाकर बड़ा ठोकर लगा जब बताया गया कि इसके लिए उन्हें अपने लुक में बदलाव करना होगा। लेकिन अंशदीप ने अपने पहनावे और लुक में बदलाव नहीं करने का फैसला किया। वे कोर्ट गए और आखिकार फैसला उनके पक्ष में आया। उन्हें राष्ट्रपति की सुरक्षा में शामिल करने से पहले कड़ी ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद एक समारोह में उन्हें राष्ट्रपति की सुरक्षा दस्ते में शामिल किया गया। वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुरक्षा दस्ते में शामिल होने वाले पहले सिख हैं।

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