शिक्षा

78% भारतीय गाँवों के माता-पिता अपनी बेटियों को स्नातक तक पढ़ाना चाहते हैं: रिपोर्ट

पिछले समय में शिक्षा मंत्रालय ने प्राथमिक शिक्षा की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की है जिसमें 78% भारतीय गाँवों के माता-पिता अपनी बेटियों को स्नातक तक और अधिक पढ़ाना चाहते हैं। यह रिपोर्ट 20 राज्यों के 6,229 ग्रामीण परिवारों द्वारा साझा की गई डेटा के आधार पर तैयार की गई है।

भारतीय स्वतंत्रता के बाद शिक्षा में सुधार

देश की स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के स्तर में कई सुधार हुए हैं। इसके साथ ही, लड़कियों की शिक्षा में भी कई सुधार हुए हैं। यही कारण है कि लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई है। हाल ही में, शिक्षा मंत्रालय ने इसके बारे में रिपोर्ट के माध्यम से देश को सूचित किया। यह रिपोर्ट संगठन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साझा की थी।

ग्रामीण क्षेत्रों के माता-पिता चाहते हैं बेटियों को स्नातक तक पढ़ाना

शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, अब ग्रामीण क्षेत्रों के 78% माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटियाँ स्नातक और उच्च शिक्षा प्राप्त करें। इसके अलावा, 82% माता-पिता चाहते हैं कि उनके बेटे शिक्षित हों। रिपोर्ट के अनुसार, पुराने नियमों को समाज में तोड़ दिया गया है और माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटियाँ स्नातक में अपने बेटों के पीछे ना रहें।

शिक्षा मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट

हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने प्राथमिक शिक्षा की स्थिति पर अपनी पहली रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट को 20 राज्यों के 6,229 ग्रामीण परिवारों द्वारा साझा की गई डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट के आंकड़ों में ग्रामीण क्षेत्रों में 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चे शामिल हैं। इन 6,229 ग्रामीण परिवारों में से 6,135 में स्कूल जाने वाले छात्र थे। हालांकि ऐसे 56 छात्र भी थे जो स्कूल छोड़ चुके थे, ऐसे 38 बच्चे भी थे जिन्होंने कभी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया था।

परिवार की आय भी छोड़ने का कारण

रिपोर्टों के अनुसार, 56 छात्रों में से 36.8% लड़की के माता-पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने परिवार की आय में मदद करने की आवश्यकता होने के कारण स्कूल छोड़ दिया। जबकि 31.6% माता-पिता ने बताया कि उनके बच्चे अध्ययन में रुचि नहीं रखने के कारण स्कूल छोड़ दिया। दूसरी ओर, 21.1% माता-पिता ने रिपोर्ट किया कि उनकी बेटी स्कूल छोड़ने का कारण घरेलू काम और सहोदरों की देखभाल करने की थी।

75% लड़के और 65% लड़कियाँ स्कूल छोड़ दिया

रिपोर्ट ने और भी बताया कि कुल मिलाकर 71.8% लड़के के माता-पिता ने कहा कि उनके बेटे अध्ययन में रुचि नहीं रखने की वजह से स्कूल छोड़ दिया। वहीं, 48.7% ने कहा कि उनके बेटे ने अपने परिवार की आय में योगदान करने की वजह से पढ़ाई छोड़ दी। सर्वेक्षण में बताया गया कि छात्रों में से एक चौथाई बच्चे प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही स्कूल छोड़ देते हैं। लड़कियों की छोड़ने की दर इस स्तर पर 35% से अधिक थी। इसके साथ ही, रिपोर्ट में बताया गया कि प्राथमिक स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद लगभग 75% लड़के और 65% लड़कियाँ स्कूल छोड़ दिया था।

समापन

इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय माता-पिता का नया दृष्टिकोण आया है। इससे साफ होता है कि उन्हें अपनी बेटियों को स्नातक और उच्च शिक्षा देने की इच्छा है।

पूछे जाने वाले 5 अनूठे प्रश्न:

  1. क्या इस रिपोर्ट का असर शिक्षा में सुधारों पर होगा?
  2. क्या राज्य सरकारें इस दिशा में कोई कदम उठा रही हैं?
  3. क्या शिक्षा के क्षेत्र में अधिक सुधार की आवश्यकता है?
  4. क्या बेटियों के शिक्षित होने से समाज में परिवर्तन होगा?
  5. क्या इस रिपोर्ट के परिणामस्वरूप सरकार को कोई नीतियाँ बनानी चाहिए?

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