विज्ञान और तकनीक

एक यूरोपीय उपग्रह इस सप्ताह धरती पर गिरेगा

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने एक पहल शुरू की है जिसमें एओलस, एक अप्रयुक्त उपग्रह की धरती पर वापसी कराई जा रही है। इस मिशन से उन उपग्रहों की सुरक्षित वापसी की संभावना है जिन्हें पहले से ही यंत्रित रूप से पृथ्वी के लिए वापसी के लिए नहीं बनाया गया था।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने एक पहल-एक-इस्तेमाल उपग्रह एओलस को धरती की ओर मोड़ने के लिए एक अद्भुत मिशन शुरू किया है। इस मिशन के जरिए उन सैटेलाइट्स को सुरक्षित रूप से वापस लाने का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है, जिन्हें पहले से ही नियंत्रित प्रवेश के लिए नहीं बनाया गया था।

उपग्रह का विवरण:

यह उपग्रह 19 जून से अपने संचालनात्मक ऊंचाई से 320 किलोमीटर पृथ्वी की सतह से नीचे गिर रहा है, जब यह 280 किलोमीटर के नीचे पहुंच गया तो ईएसए मिशन ऑपरेटर्स ने एओलस के आखिरी ईंधन का उपयोग करके उसे धीरे-धीरे पृथ्वी की ओर वापस संचालित करने के लिए पहला महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। आखिरी परिवर्तन 28 जुलाई को होने की योजना है, जिसमें ऑपरेटर्स उपग्रह को 150 किलोमीटर से 120 किलोमीटर की ऊंचाई पर मार्गदर्शन करेंगे। इस समय पर, उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने का प्रारंभ होगा। लगभग 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर, उपग्रह का बड़ा हिस्सा जलकर खत्म हो जाएगा, लेकिन कुछ टुकड़े पृथ्वी की सतह तक पहुंच सकते हैं। मिशन नियंत्रक टीम रिमोट एटलांटिक महासागर के एक दूरवर्ती क्षेत्र का अनुसरण कर रही है, इसलिए यह किसी भी खतरे का सामना नहीं करेगा।

मिशन के प्रमुख फायदे:

एओलस के विषय में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया है कि अटलांटिक महासागर अंतिम प्रवेश चरण के दौरान सैटेलाइट की सर्वोत्तम दृश्यता प्रदान करता है। इसके अलावा, एजेंसी दावा करती है कि नियंत्रित प्रवेश करने वाले उपग्रहों से आमतौर पर होने वाले खतरे का स्तर काफी कम होता है और यह प्रयास इस खतरे को 42 गुना कम कर देगा।

एओलस का नामकरण:

यह उपग्रह यूनानी पौराणिक कथाओं में हवाओं के रक्षक के नाम पर रखा गया है। एओलस को 2018 में लॉन्च किया गया था और यह पूरी दुनिया में हवाओं की गति और दिशा को सीधे रूप से मापने वाला पहला उपग्रह बनने का गर्व हासिल किया था। इसके माध्यम से वैज्ञानिक विश्वव्यापी मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाया गया।

निष्कर्ष:

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा आयोजित यह पहल-एक-इस्तेमाल उपग्रह मिशन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विज्ञापन जगत को सुरक्षित रूप से वापस लाने की संभावना होती है, जो पहले से ही नियंत्रित प्रवेश के लिए नहीं बनाए गए थे। इस सफलता से भविष्य में और भी उच्च दर्जे के उपग्रहों को सुरक्षित रूप से वापस लाना संभव होगा। एओलस के प्रयास से उपग्रह से होने वाले खतरे को काफी कम किया जा सकता है जो कि सैटेलाइट्स की नियंत्रित प्रवेश के दौरान होता है। यह मिशन वैश्विक मौसम पूर्वानुमान को सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान देगा जो सारे विश्व के लिए लाभकारी होगा।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

  1. यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?

    • इस मिशन से ऐसे उपग्रहों को वापस धरती पर लाने की संभावना है, जिन्हें पहले से ही यंत्रित रूप से पृथ्वी के लिए नहीं बनाया गया था।
  2. यह मिशन किस नाम से जाना जाता है?

    • इस मिशन का नाम एओलस है, जो यूनानी पौराणिक कथाओं में हवाओं के रक्षक के नाम पर रखा गया है।
  3. उपग्रह को कौन नियंत्रित कर रहा है?

    • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के मिशन ऑपरेटर्स उपग्रह को नियंत्रित कर रहे हैं।
  4. इस मिशन का आविष्कार किसने किया था?

    • यह मिशन 2018 में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा आविष्कार किया गया था।
  5. एओलस ने किस मिशन के दौरान विश्व में पहली बार क्या किया था?

    • एओलस ने विश्व भर में हवाओं की गति और दिशा को सीधे रूप से मापने वाला पहला उपग्रह बनने का गर्व हासिल किया था, जिससे वैश्विक मौसम पूर्वानुमान सुधारे जा सकते थे।

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