व्यापार और अर्थव्यवस्था

अफगानिस्तान की लड़खड़ाती Economy को मिला सहारा, डॉलर के मुकाबले मजबूत हुई अफगान मुद्रा

काबुल: अफगानिस्तान (Afghanistan) की राष्ट्रीय मुद्रा अफगानी के मुकाबले गुरुवार को अमेरिकी डॉलर का मूल्यह्रास देखने को मिला है। जहां कई दिनों पहले तक अफगान मुद्रा डॉलर के मुकाबले काफी गिर गई थी, वहीं अब इसमें कुछ मजबूती दर्ज की गई है। कई दिनों पहले तक जहां एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अफगानी 130 पर जा पहुंची थी, वहीं गुरुवार को यह एक डॉलर के मुकाबले 95 पर आ गई।

जानकारी के मुताबिक अफगानिस्तान के सबसे बड़े मुद्रा परिवर्तक बाजार सारा-ए-शहजादा के अधिकारियों के हवाले से कहा कि सरकारी अधिकारियों और मुद्रा परिवर्तकों की बुधवार को देश के केंद्रीय बैंक दा अफगानिस्तान बैंक (DAB) के साथ एक संयुक्त बैठक के बाद एक डॉलर का मूल्य 130 अफगानी से गिरकर 102 अफगानी हो गया है। बुधवार को देश के केंद्रीय बैंक दा अफगानिस्तान बैंक (डीएबी) में बदलाव किए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, “बुधवार को अफगानी मुद्रा 1 डॉलर के मुकाबले 102 पर कारोबार कर रही थी। मंगलवार को अफगानी 1 डॉलर के मुकाबले 123 पर कारोबार कर रही थी, जो कि कुछ जगहों पर 130 तक पहुंच गई थी। आज सुबह अफगानी 1 डॉलर के मुकाबले 95 पर दर्ज की गई है।”

इसके साथ ही खाद्य और गैर-खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी गिरावट आई है। गुरुवार को 2,400 अफगानी में 55 किलो आटे का बैग (बोरी) बिक रहा था, जबकि मंगलवार को इसकी कीमत 3,200 अफगानी थी।

16 किलो/लीटर खाना पकाने का तेल (कुकिग ऑयल) अब 2,800 अफगानी में मिल रहा है, वहीं 7 किलो चीनी 460 अफगानी में बेची जा रही है, जिनकी कीमतें कई दिनों पहले तक आसमान छू रही थी। इसके अलावा देश में अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है। साथ ही 1 किलो तरल गैस 88 अफगानी, एक लीटर पेट्रोल 84 अफगानी और एक लीटर डीजल अब 75 अफगानी में बिक रहा है। अफगानी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में तेजी के पीछे कथित तौर पर बाजार में उच्च मांग के साथ ग्रीनबैक या बैंक नोट की कमी बताई गई है।

देशवासियों के लिए यह राहत की खबर ऐसे समय पर आई है, जब देश की मुद्रा में हाल ही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी। अफगानिस्तान का केंद्रीय बैंक देश के आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई (मुद्रास्फीति) को हल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

संकट के पीछे मुख्य कारकों में देश से विदेशी ताकतों की जल्दबाजी में वापसी है। विदेशी सहायता के बंद होने के साथ, देश की अर्थव्यवस्था लगातार पतन पर है और कीमतों में बढ़ोतरी के साथ बुनियादी वस्तुएं तेजी से आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। हालांकि अब जरूरी चीजों की कीमतों में कमी आने से नागरिकों को कुछ राहत जरूर मिली होगी।

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