AB फाउंडेशन का देश की बडी आबादी को अवसाद मुक्त करने के सुझावों पर सार्थक वेबिनार

Medhaj News 26 Oct 20 , 18:52:00 India Viewed : 2016 Times
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अप्रैल 2020 से ही  देश  सेवा  भाव  से लगा  AB फाउंडेशन  का  कार्य  समाज  को  लाभान्वित  कर रहा है | देश की एक बड़ी आबादी मानसिक अवसाद से गुजर रही हैं । इस परेशानी को समझते हुए एबी फाउंडेशन ने डिप्रेशन पर वेबीनार का रविवार को आयोजन किया, जिसमें देश के जाने-माने विशेषज्ञों ने अपने ज्ञान और अनुभव से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुमूल्य सुझाव दिए। 

पहली वक्ता थीं  मुंबई की जानी-मानी साइकोलॉजिस्ट  डॉक्टर ज्योत्सना सिंह  उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन में योग यानी मेडिटेशन तथा अपने दिमाग को शांत रखने पर बल दिया। 

कार्यक्रम के दूसरे वक्ता के रूप में  दिल्ली के लब्ध प्रतिषठ डॉक्टर आनंद पांडे इस पर बल दिया कि मनुष्य का सबसे मुख्य अंग उसका मस्तिक होता है किंतु मस्तिक के ऊपर काम करने वाले डॉक्टर की बहुत ही ज्यादा जरूरत है जो कि देश में काफी कम है।  उन्होंने बताया कि मनुष्य की बहुत सारी बीमारियो का मुख्य कारण मानसिक अवसाद ही है। उन्होंने स्ट्रेस मैनेजमेंट , failure मैनेजमेंट तथा सक्सेस मैनेजमेंट की आवश्यकता  पर बल दिया।





कार्यक्रम के अन्य वक्ता के रूप में डॉक्टर राधाकांत पांडे ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। कार्यक्रम के पार्टिसिपेंट के रूप में सीनियर आईपीएस अधिकारी श्री आलोक श्रीवास्तव ने भी अपने अनुभव बांटने के साथ सुझाव भी दिए।  उन्होंने पुलिस तंत्र में मानसिक अवसाद की उपस्थिति को बताया जो उनके ड्यूटी की विषमताओं के कारण होती है । उस पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने  पुलिस रिफॉर्म  को आज की सबसे बडी जरूरत बताया।

संस्था के मीडिया सलाहकार श्री पदम पति शर्मा  ने अपने 45 वर्षों के दीर्घकालीन पत्रकारिता के दौरान अपने बहुत सारे अनुभवों को साझा किया तथा समाधान की जरूरत पर बल दिया।

संस्था के ट्रस्टी श्री सीए चंद्रकांत मिश्रा ने भी  फाउंडेशन की ओर से किए जा रहे कार्यक्रम की जानकारी दी।  

कार्यक्रम के मॉडरेटर श्री रवि पांडे ने भी अपने कुछ प्रश्नों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को समझने तथा उन्हें  सुलझाने का प्रयास किया।।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन में एडवोकेट आनंद कुमार सिंह ने बताया कि भारत 153 देशों की हैप्पीनेस इंडेक्स की लिस्ट में 144 नंबर है तथा भारत में मानसिक अवसाद की मौजूदगी काफी ज्यादा है । इस में सबसे ज्यादा  शिकार निम्न तथा मध्यवर्गीय आबादी है, जिनको उनका उचित  ट्रीटमेंट नहीं मिल पा रहा है।  डॉक्टरों की भी काफी कमी है.। 

मानसिक अवसाद के अधिकतर मामलों में इसका दूसरा कदम आत्महत्या हो सकता है तथा पुरुषों की तुलना में महिलाओं में मानसिक अवसाद ज्यादा है। इसलिए इस पर नियंत्रण पाने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने अपने सारे विशेषज्ञ तथा पार्टिसिपेंट को धन्यवाद देते हुए  मां दुर्गा से सभी के स्वास्थ्य की  बेहतरी के लिए प्रार्थना की।



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