आइये जानते है राम नगरी अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर के बारे में, जहां साक्षात हनुमान जी का वास हैं

Medhaj news 24 Nov 20 , 14:47:10 India Viewed : 3270 Times
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'जहां राम वहां हनुमान और जहां हनुमान वहां राम' कुछ ऐसी ही है प्रभु श्रीराम की पावन जन्मस्थली अयोध्या (Ayodhya) | अयोध्या में बजरंग बली का विश्व विख्यात मंदिर 'हनुमान गढ़ी' (Hanuman Garhi Mandir) स्थित है | हनुमानजी को अयोध्या का रक्षक माना जाता है और कहते हैं कि हनुमानजी की आज्ञा लिए बिना कोई प्रभु श्रीराम के दर्शन नहीं कर सकता है | आइये आपको बताते हैं राम नगरी अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर के बारे में, जहां साक्षात हनुमान जी का वास हैं | अयोध्या पुरी प्रभु श्रीराम की नगरी है | यहां के कण-कण में श्रीराम बसते हैं | यहां की मिट्टी भी श्रीराम की चरण रज से पावन है | अयोध्या में श्रीराम की लीलाएं हुई हैं | यहां प्रभु अपने भ्राताओं और अपनी अर्धांगिनी जगकनंदिनी सीता के साथ विराजते हैं | अब जहां प्रभु श्रीराम हैं, वहां उनके परम भक्त हनुमान तो होंगे ही | अयोध्या स्थित हनुमान गढ़ी मंदिर के बारे में मान्यता है कि हनुमानजी यहां सदैव वास करते हैं | 

अयोध्या का सबसे प्रमुख श्री हनुमान मंदिर 'हनुमानगढ़ी' के नाम से प्रसिद्ध है | यह मंदिर ऊंचे टीले पर स्थित है | कहा जाता है कि हनुमानजी को रहने के लिए यही स्थान दिया गया था इसलिए इसे हनुमान जी का घर भी कहा जाता है | इस मंदिर को लेकर यह भी मान्यता है कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को भगवान प्रभु श्रीराम के दर्शन से पहले उनके भक्त हनुमानजी के दर्शन करने होते हैं | हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत गौरी शंकर दास (Mahant Gauri Shankar Das) ने बताया कि मंदिर का इतिहास सिराजुद्दौला के समय का है | नवाब सिराजुद्दौला को कोई असाध्य रोग हो गया था | नवाब यहां इमली के बाग में पूजा अर्चना करने वाले बाबा अभय रामदास जी के पास आया और स्वस्थ हो गया | उसके बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया | मंदिर में स्थापित हनुमानजी को लेकर मान्यता है कि जब लंका को जीतकर भगवान श्रीराम (Lord Sri Rama) अयोध्या वापिस आए तो उनके साथ हनुमान जी भी आए | प्रभु श्रीराम जब अपनी लीला पूरी करके वापिस गौलोक जाने लगे तो हनुमानजी ने साथ जाने से मना कर दिया | हनुमानजी पृथ्वी पर ही रुकना चाहते थे | उनका कहना था कि जहां श्री राम के भजन होते हैं, वे वहीं रुकेंगे और श्रीराम की आराधना करेंगे | तब भगवान श्रीराम हनुमान जी को अयोध्या में ही छोड़कर अपने धाम गौलोक चले गए | 

हनुमान गढ़ी के इस दिव्य मंदिर को लेकर मान्यता है कि पूरे देश में बजरंग बली हनुमानजी की इस मंदिर जैसी जाग्रत मूर्ति कहीं नहीं है | मंदिर में श्रीहनुमान के पीछे श्रीराम दरबार विराजता है | महंत गौरी शंकर दास ने बताया कि मंदिर में स्थापित मूर्ति इतनी दिव्य है कि यदि सेवा में पुजारी से कोई गलती हो जाए तो स्वयं भगवान हनुमान दो घंटे में पुजारी को उसकी त्रुटि का एहसास दिलाते हैं | इस अद्भुत मंदिर में भगवान के साथ पत्राचार की भी परंपरा है | पुजारी पत्र (Letter) लिख कर भगवान हनुमान से अलग-अलग विषयों पर आज्ञा लेते हैं | गर्मियों में इस मंदिर के कपाट सुबह 5 बजे खुलते हैं और रात दस बजे बंद होते हैं, जबकि सर्दियों में मंदिर के पट सुबह 6 बजे खुलते हैं | ऋतु कोई भी हो, मंदिर में श्रद्धालुओं की हमेशा भीड़ रहती है | मंगलवार को प्रभु हनुमान के भक्त बड़ी मात्रा में हनुमानगढ़ी दर्शन करने आते हैं | 


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      Commented by :Aslam
      24-11-2020 21:40:05

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      Commented by :Bal Gangadhar Tilak
      24-11-2020 17:43:53

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      Commented by :Mohammad Ashhab Alam
      24-11-2020 16:44:47

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