बंगाली समुदाय की महिलाएं एक-दूसरे के सिंदूर लगाकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं

Medhaj News 26 Oct 20 , 15:00:10 India Viewed : 1898 Times
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भारतीय त्योहारों में शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) का काफी महत्व है | 9 दिनों तक मां की आराधना करने के बाद उन्हें पूरे रस्मोरिवाज के साथ विदा किया जाता है | दशहरा (Dussehra) के मौके पर बंगाली समुदाय की महिलाएं सिंदूर खेला (Sindoor Khela) की रस्म के साथ मां को विदा कर उनका आशीर्वाद लेती हैं | शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन दुर्गा पूजा (Durga Puja) और दशहरा के अवसर पर बंगाली समुदाय की महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं | इसके बाद सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं | मां को खुशी-खुशी विदा करने की रस्म को सिंदूर खेला के तौर पर मनाया जाता है | सिंदूर खेला के वक्त विवाहित महिलाएं पान के पत्तों से मां दुर्गा के गालों को स्पर्श करते हुए उनकी मांग और माथे पर सिंदूर लगाकर अपने सुहाग की लंबी आयु की मुराद मांगती हैं | इसके बाद महिलाएं मां को पान और मिठाई का भोग अर्पित करती हैं | 

दशमी पर सिंदूर लगाने की पंरपरा सदियों से चली आ रही है | मान्यता है कि मां दुर्गा साल में एक बार अपने मायके आती हैं और 10 दिन तक वहीं रुकती हैं | इसे दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है | सिंदूर खेला की रस्म पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में पहली बार शुरू हुई थी | अब इसे देशभर में मनाया जाता है | दशमी पर मां पार्वती अपने पति के घर यानी भगवान शिव के पास वापस कैलाश पर्वत पर चली जाती हैं | सौराल विदाई (विसर्जन) से पहले मां के साथ पोटली में श्रृंगार का सामान और खाने की चीजें रखी जाती हैं | इसे देवी बोरन (Devi Boran) कहा जाता है | सिंदूर खेला की रस्म के जरिए महिलाएं एक-दूसरे के सुहाग की लंबी आयु की कामना करती हैं | इस रस्म के दौरान मां को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए धुनुची नृत्य करने की भी परंपरा है |  


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    • Colors of joy

      Commented by :Sirajuddin Ansari
      26-10-2020 18:00:25

    • Good

      Commented by :Ajay Kumar
      26-10-2020 16:42:32

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