वाइको ने कहा तमिल ईलम राज्य के लिए जनमत संग्रह होना चाहिए

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एमडीएमके महासचिव और तेजतर्रार नेता वाइको ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तमिल ईलम के एक संप्रभु राज्य के लिए वैश्विक तमिल प्रवासियों के बीच एक जनमत संग्रह कराने का प्रयास करने का आग्रह किया है। उनके मुताबिक ये भारत के लिए राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा का आधार हो सकता है।

गुरुवार को प्रधान मंत्री को लिखे एक पत्र में, तमिल राष्ट्रवादी नेता और राज्यसभा के सदस्य वाइको ने कहा कि भारत सरकार को तमिल लोगों की इच्छाओं की रक्षा करनी चाहिए और एक अलग तमिल ईलम के लिए जनमत संग्रह कराने के लिए कदम उठाने चाहिए।वाइको ने कहा, "अगर भारत तमिल ईलम की रक्षा करने में विफल रहता है तो इससे देश हिंद महासागर में अपना प्रभुत्व खो देगा और इस क्षेत्र में चीन की उपस्थिति का मार्ग प्रशस्त करेगा।"

तमिल ईलम के लिए अपने मुखर समर्थन के लिए जाने जाने वाले वाइको ने कहा कि जैसे यहूदियों ने इजराइल बनाया और भारत ने बांग्लादेश बनाया, उसी तरह केंद्र सरकार को एक अलग तमिल ईलम के लिए संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक जनमत संग्रह करना चाहिए।

एमडीएमके नेता ने कहा कि विदेश नीति निमार्ताओं की राय है कि अगर भारत तमिल ईलम मुद्दे पर सक्रिय होता है तो श्रीलंका चीन की ओर अधिक झुकेगा, यह एक मिथक रणनीति है।वाइको ने पत्र में यह भी कहा, "अब भी श्रीलंका चीन का मुखर समर्थक है । अगर भारत तमिल ईलम के साथ खड़ा होता है तो श्रीलंका चीन की ओर अधिक झुकेगा, यह विदेश नीति निमार्ताओं द्वारा रणनीति में देरी करने के उद्देश्य से किया गया एक गलत मान्यता है।"

नेता ने कहा कि चीन पहले ही 99 साल के लिए हनबनथोट्टा बंदरगाह का अधिकार ले चुका है और आसपास के क्षेत्र भी चीनियों के पास हैं।उन्होंने कहा कि लगभग 3 लाख चीनी मजदूर श्रीलंका में हैं।उन्होंने कहा कि चीन की सॉफ्ट पावर बढ़ाने के लिए द्वीपीय राष्ट्र में चीनी स्कूल, साहित्य निकाय और कराटे स्कूल खोले जा रहे हैं।

वाइको ने आईएएनएस से कहा, "चीन से घिरा हिंद महासागर एक खतरनाक परि²श्य है और हमारे लिए एकमात्र समाधान भारत के लिए राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा आधार के लिए एक संप्रभु तमिल ईलम है। मैंने विशेष रूप से प्रधान मंत्री को पत्र लिखा है इस मुद्दे को अत्यंत महत्व के साथ संबोधित करें।"



 

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