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प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनामी बनाए जाने पर हुआ मंथन

यूपी वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी प्रोजेक्ट में कृषि और संबद्ध क्षेत्र की गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा के लिए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्य भवन, लखनऊ में एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कैबिनेट मंत्री जल शक्ति, स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री पशुपालन, धर्मपाल सिंह, और राज्य मंत्री, कृषि, बलदेव सिंह औलख के साथ मुख्यमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू ने भाग लिया।

कृषि उत्पादन आयुक्त, मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव कृषि, डॉ. देवेश चतुर्वेदी और सचिव, कृषि डॉ. राज शेखर भी उपस्थित थे। परियोजना के सलाहकार के रूप में डेलॉइट ने इस वर्ष की शुरुआत में प्रस्तुत रणनीति रिपोर्ट के आधार पर अगली तिमाही के लिए कार्य योजना के साथ अब तक कार्यान्वयन की स्थिति प्रस्तुत की।

इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि आज मंत्री स्तर पर यह पहला प्रेजेंटेशन हुआ है। इस संबंध में प्रयासों को और बेहतर किए जाने की आवश्यकता है। डेलाइट के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझाव के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस पर उचित विचार विमर्श करके 2 सप्ताह के बाद एक दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाए जिसमें विषयों को और विस्तार से प्रस्तुत किया जाए। जिससे यह स्पष्ट हो सके कि धरातल पर कार्य करने में किस प्रकार की कठिनाइयां हैं तथा शासन स्तर पर उसमें क्या सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट पर विशेष चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस पर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के लिए व्यापक और प्रभावी कार्ययोजना बनाए जाने की आवश्यकता है।

डेलॉइट के प्रतिनिधियों द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए, ब्लॉक स्तर पर लक्षित उपज सुधार के लिए मॉडल किसानों का नामांकन चल रहा है, जो प्रत्येक ब्लॉक में प्रमुख फसलों में सर्वाेत्तम गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद करेगा। विविधीकरण को बढ़ावा देने और मूल्य प्राप्ति बढ़ाने के लिए दलहन, तिलहन और बाजरा के लिए समर्पित फसल विविधीकरण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। मक्का उत्पादन बढ़ाने के लिए एक कार्यक्रम विकसित किया गया है। क्योंकि यह पशु चारा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है। बीज उत्पादन के क्षेत्र में काम करने वाले बड़े निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य में एक बीज पार्क विकसित करने की योजना भी बनाई गई है। इसके साथ ही बीज और पौध उत्पादन और वितरण तंत्र को सुव्यवस्थित किया जा रहा है। इस पर अगले महीने तक योजना तैयार होने की उम्मीद है।

नवीन प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए बागवानी विभाग के तहत उत्कृष्टता विकसित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मजबूत मांग पैदा करते हुए ब्रांड यूपी विकसित करने और कृषि जीआई टैग वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यान्वयन का फोकस किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए टिशू कल्चर को बढ़ावा देने और मूल्य संवर्धन के स्तर को बढ़ाने के लिए राज्य में सूक्ष्म प्रसंस्करण समूहों के विकास पर भी होगा।

पशुपालन, कृषि, योजना विभाग और आईजीएफआरआई के साथ सर्वसम्मति से व्यापक राज्यव्यापी चारा योजना के विकास को अंतिम रूप दिया गया है। गोवंश की नस्लों में सुधार तथा देसी नस्लों के संरक्षण के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को बढ़ाने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ काम चल रहा है। इसके अलावा, दूध नीति को अधिक आकर्षक बनाने और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए इसमें आवश्यक संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं। उत्पादन बढ़ाने और यूपी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पोल्ट्री और मत्स्य पालन में भी हस्तक्षेप की योजना बनाई गई है।

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