ओला, उबर जैसी कैब कंपनियों को भारत सरकार की गाइडलाइन्स से बड़ा झटका

Medhaj news 28 Nov 20 , 07:59:11 Business & Economy Viewed : 972 Times
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ओला, उबर जैसी कैब कंपनियों को भारत सरकार की नई मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइन्स से बड़ा झटका लगा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को मोटर व्हीकल एग्रीगेटर दिशा निर्देश 2020 जारी किया। मंत्रालय ने राज्य सरकारों से इसे लागू करने को कहा है। नए दिशा निर्देशों के मुताबिक, टैक्सी संचालन करने वाली कंपनियों को राज्य सरकारों से लाइसेंस लेना होगा। सिस्सेमेटिक फेल्योर से यात्री और ड्राइवर की सुरक्षा का खतरा हुआ तो लाइसेंस निलंबित हो सकता है। राज्य सरकारें किराया तय कर सकेंगी। दिशा निर्देश में एग्रीगेटर को परिभाषा को शामिल किया गया है | इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में बदलाव किया गया है। हर ड्राइव पर ड्राइवर को 80 फीसदी किराया मिलेगा, कंपनियों के खाते में सिर्फ 20 फीसदी जाएगा। एग्रीगेटर को बेस फेयर से 50 फीसदी कम लेने की अनुमति होगी। यात्रा रद्द करने पर अधिकतम चार्ज किराए का 10 फीसदी होगा पर यात्री और ड्राइवर दोनों के लिए 100 रुपये से अधिक नहीं होगा।

एग्रीगेटर द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवा को सर्विस माना जाएगा, जिससे नौकरी पैदा होती है और लोगों को परिवहन की सुविधा मिलती है। शेयरिंग सुविधा से खपत घटेगी साथ ही इंपोर्ट बिल कम होगा। इसके अलावा वाहनों से होने वाले प्रदूषण का स्तर घटेगा और इससे लोगों की सेहत को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। कारोबारी संचालन के लिए राज्य सरकारों द्वारा जारी लाइसेंस अनिवार्य है।केंद्र सरकार की गाइंडलाइंस का पालन हो इसकी जिम्मेदारी राज्या सरकारों की होगी। गाइडलाइंस का उद्देश्य एग्रीगेटर के लिए राज्य सरकारों द्वारा एक रेगुलेटरी व्यवस्था बनाना है जिससे जवाबदेही तय हो।



 


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      Commented by :Sushil Kumar Gautam
      28-11-2020 17:28:38

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      Commented by :Nasir Hussain
      28-11-2020 13:10:23

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      Commented by :Rinku Ansari
      28-11-2020 11:42:53

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