बिजली की अनुपलब्धता का संकट और उसके पीछे का कारण

बिजली उत्पादन में तीसरा सबसे बड़ा देश भारत (2020 के आंकड़ों के अनुसार) बड़े पैमाने पर बिजली कटौती का सामना कर रहा है। बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली की उपलब्धता में कटौती हो रही है। भीषण लू और लोगों द्वारा बिजली की अधिक खपत बिजली अनुपलब्धता के कारण हैं ।

भारत वर्तमान समय में बड़े बिजली संकट से जूझ रहा है और अधिक आपूर्ति और बिजली के उत्पादन को पटरी पर लाने की मांग कर रहा है।

हालांकि अगर देखा जाये तो बिजली की आपूर्ति और खपत के बीच कई मुद्दे हैं  जो सामने आए हैं। एक महत्वपूर्ण मुद्दा जिसने बिजली की मांग को बढ़ा दिया है वो है COVID 19, जिसने लोगों को अपने घरों में बंद कर दिया और लोगों को घर से काम करने के लिए मजबूर कर दिया है।

बिजली संकट का सबसे प्रमुख कारण कई राज्यों के लिए कोयले की उपलब्धता भी है। कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने अब भी कोयले का आयात नहीं किया है। इसके सम्बन्ध में बिजली मंत्रालय ने पहले ही नोटिस जारी कर दिया था तथा मानसून तक कोयले की पर्याप्त उपलब्धता को पूरा करने के लिए आवश्यक और तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा था।

कई रिपोर्ट्स के अनुसार, बिजली की अधिक खपत के कारण बहुत सारे बिजली उत्पादन संयंत्र कोयले की अत्यधिक कमी का सामना कर रहे हैं। वजह यह भी है के पिछले ९ वर्षों की तुलना में इस वर्ष यूटिलिटीज के पास कोयले का औसतन सबसे कम स्टॉक है।

मौजूदा बिजली मांग में भी मजबूती से 15% की वृद्धि हुई है हालांकि, बिजली मंत्रालय जेनको राज्यों को कम से कम 10% सम्मिश्रण पर वापस जाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

राज्य द्वारा संचालित कोल इंडिया द्वारा रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद रेलवे की पर्याप्त ट्रेनों की आपूर्ति में असमर्थता के कारण कई यूटिलिटीज कोयले स्टॉक की भरपाई करने में सक्षम नहीं हो पायीं हैं।

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