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ईश्वर का वरदान बेटियाँ

हम बेटियाँ ईश्वर का एक अनमोल वरदान हैं,
जिसके अपरिमित गुणों से सृष्टि का हर शख्श अनजान है;
फूलों जैसे हँसी हमारी और अग्नि जैसा तेज है,
सबको बस खुशियाँ बाँटों, देते ये सन्देश हैं;

हम बेटियों की असली अहमियत एक माँ ही जानती है,
हर घड़ी वो अपना बचपन हम में निहारती है;
ज़माने की नज़र न लग जाये उसकी बिटिया को,
इसीलिए बार-बार वो उसकी नज़र उतारती है;

पंछियों सा निश्छल उड़ जाना चाहते हैं हम,
किसी से कम नहीं ज़माने को यही दिखाना चाहते हैं हम;
हर जन्म में बेटी बनने की हसरत रखते हैं हम,
इस दुनियाँ को यही चीख-चीख कर बताना चाहते हैं हम;

जो भी कोई कहता है कि हमें बेटी न देना,
ऐसो के मुहँ पर जोरदार तमांचा लगाना चाहते हैं हम;
हम कोई मिट्ठी की गुड़िया नहीं हैं, हम में भी जान है,
थोड़े बहुत सपने हैं जिनको पूरे करने का अरमान है;

अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिए,
इस दुनिया से भी टकराना जानते हैं हम;
मेरी जिंदगी, मेरी ख्वाब, मेरी अपनी ये लड़ाई है,
इसी लड़ाई में कभी जीतना तो कभी हार जाना चाहते हैं हम;

बेटियाँ हैं हम और हमें गर्व है इसी पर,
हर रिश्ते को दिल से निभाना जानते हैं हम;
हर बार दिल से रज़ा है खुदा से,
कि हर जनम में बेटी बनकर इस दुनियाँ में आना चाहते हैं हम;

प्रेम, ममता, त्याग सब है इन्हीं दो बाँहों में,
फिर भी काँटें ही क्यों होते हैं हमारी राहों में;
मखमल सा कोमल मन होता है हमारा,
इस कठोर दुनियाँ को बस यही समझाना चाहते हैं हम;

बेटियों (स्त्री) की रक्षा करें, यही सृष्टि का आधार हैं,
इनके बिना एक क्षण भी जीवन बिना श्वांस समान है;
सारी बेड़ियाँ तोड़ कर अब, हद से गुज़र जाना चाहते हैं हम,
विश्व पटल पर अपने नाम का परचम लहराना चाहते हैं हम;

बार-बार बेटी बनकर ही, दुनिया में आना चाहते हैं हम।
बार-बार बेटी बनकर ही, दुनिया में आना चाहते हैं हम।

–(Copyright@भावना मौर्य “तरंगिणी”)—

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