देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र राज्य की पूरी सियासत ही पलट दी

1981 में आई फिल्म नसीब का वह गाना पकड़ो पकड़ो पकड़ो देखो जाने न पाए……. उसकी बीच की लाइन थी ये खेल है प्यारे , प्यार नहीं दिल है प्यारे , दिल दार नहीं है। ऐसी ही लाइन आज कल भारतीय जनता पार्टी विपक्ष को कह रही है। शिवसेना का ऐसा हाल हुआ, उसके बाद राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का इस गाने को चरितार्थ करता है।

महाराष्ट्र में अजित पवार और उनके समर्थक विधायकों को अपने साथ मिलाकर देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की पूरी सियासत ही पलट दी है। और २०१९ में शरद पावर ने कुछ ही घंटे में उनकी सरकार गिरा दी थी उसका बदला भी ले लिया कल तक जितने भी सर्वे सामने आ रहे थे। उनमें यह बताया जा रहा था कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी को सबसे ज्यादा सीटें मिलेंगी। सर्वे में बीजेपी को काफी नुकसान होने की बात कही जा रही थी। एनसीपी नेता सुप्रिया सुले की तरफ से भी यह कहा जा रहा था कि अकेले देवेंद्र फडणवीस क्या करेंगे लेकिन फडणवीस ने बड़ा खेल कर दिया।

देवेंद्र फर्नाडिस और अजित पवार के सम्बन्ध कभी ख़राब नहीं रहे , देवेंद्र फर्नाडिस, हमेशा अजित पवार को अजित दादा कहते थे और दोनों कभी भी एक दूसरे पर सीधा हमला नहीं किया। येदेवेंद्र फर्नाडिस की महाराष्ट्र में यह दूसरी सफलता है इससे पहले शिव सेना का यही हाल हुआ था। महाविकास अघाड़ी की सरकार रही हो या फिर मौजूदा शिंदे सरकार हो अजित- देवेंद्र के बीच सदन में कभी तल्खी नहीं देखी गई।

अजित पवार के इस एक्शन से शिंदे को भी सतर्क हो जाना चाहिए क्योकि अब भारतीय जनता पार्टी की मज़बूरी शिंदे नहीं रहेंगे। क्योकि अजित पवार आ गए हैं, बेशक अजित पवार पर ७० करोड़ के घोटाले का आरोप है । इस साल की तरह की पिछले साल भी देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की सियासत में बड़ा फेरबदल किया था और एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर राज्य में शिंदे- बीजेपी सरकार बनाई थी।

इसके अलावा अजित पवार ने कभी भी सदन में विवादित मुद्दों को नहीं उठाया। उन्होंने देवेंद्र फडणवीस की कभी भी सीधे तौर पर आलोचना नहीं की। ऐसा ही रिश्ता देवेंद्र फडणवीस की तरफ से देखा गया। फडणवीस ने कभी अजित पवार को टारगेट नहीं किया जबकि शरद पवार हमेशा उनके निशाने पर रहे। फडणवीस ने साल 2014 के समय में भी अजित पवार को ज्यादा टारगेट नहीं किया था।

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