एक अक्टूबर से टैक्स संबंधी बदल जाएंगे ये 5 नियम, जाने क्या हैं'

Medhaj News 30 Sep 20 , 18:26:23 Entertainment Viewed : 4296 Times
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एक अक्टूबर से चालू वित्त वर्ष (2020-21) की तीसरी तिमाही की शुरुआत हो रही है। कोरोना महामारी के कारण सरकार ने कई नियमों की तारीख में बदलाव किया है। ऐसे में एक अक्टूबर से टैक्स संबंधी क्या-क्या नियम बदलने जा रहे हैं, इसके बारे में समझते हैं। सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के लिए जीएसटी वार्षिक रिटर्न और ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समयसीमा को एक महीने बढ़ाते हुए 31 अक्टूबर 2020 तक कर दिया है। CBDT ने ट्वीट किया, 'आदर्श आचार संहिता के मद्देनजर चुनाव आयोग से उचित मंजूरी हासिल करने के बाद सरकार ने GSTR-9 और GSTR-9C के तहत वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख को 30 सितंबर 2020 से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2020 तक कर दिया है।' इससे पहले सरकार ने मई में 2018-19 के लिए वार्षिक जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को सितंबर 2020 तक तीन महीने के लिए बढ़ाया था। जीएसटीआर-9 एक वार्षिक रिटर्न है, जो करदाताओं द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) शासन के तहत दाखिल किया जाता है। इसके तहत साल भर की कारोबारी गतिविधियों की पूरी जानकारी देनी होती है। जीएसटीआर-9सी एक तरह का ऑडिट फॉर्म होता है, जिसे जीएसटीआर-9 और ऑडिट किए गए वार्षिक वित्तीय विवरण के बीच एक सामंजस्य की घोषणा माना जाता है।

2018-19 के लिए बीलिटेड रिटर्न - कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने अब तक 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा है। ऐसे लोगों के लिए बीलेटेड आईटीआर भरने की आखिरी तारीख को 31 मार्च 2020 से बढ़ाकर 30 सितंबर 2020 किया गया था। हालांकि, 10 हजार रुपये की लेट फीस लगेगी। अगर आपकी आय 5 लाख से कम है तो आपको आयकर रिटर्न देरी से फाइल करने पर लेट फीस के तौर पर 1000 रुपये का भुगतान करना होगा। अगर 30 सितंबर तक भी आप आईटीआर नहीं भर पाते हैं तो आप 2018-19 का आईटीआर नहीं भर पाएंगे, जब तक कि खुद आयकर विभाग की तरफ से आईटीआर भरने के लिए नोटिस देकर आदेश ना दिया जाए। जानकारी के लिए बता दें वित्त वर्ष 2018-19 के लिए वित्त वर्ष 2019-20 असेसमेंट ईयर हुआ। असेसमेंट ईयर में एक निश्चित तारीख के बाद रिटर्न फाइल करने पर 31 दिसंबर तक 5000 रुपये और असेसमेंट ईयर की आखिरी तिमाही में रिटर्न फाइल करने पर 10 हजार रुपये का फाइन लगता है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण 2018-19 के लिए टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख (फाइन के साथ) 31 मार्च 2020 से बढ़ाकर 30 सितंबर 2020 तक कर दिया गया था।

पुराने इनकम टैक्स रिटर्न का वेरिफिकेशन - सीबीडीटी ने 13 जुलाई को एक सर्कुलर जारी कर के कहा था कि आयकर विभाग की तरफ से पुराने आईटीआर का वेरिफिकेशन कराने के लिए एक बार राहत दी जा रही है। सर्कुलर के अनुसार जिन लोगों ने 2015-16, 2016-17, 2017-18, 2018-19 और 2019-20 असेसमेंट ईयर के लिए भरे आईटीआर का वेरिफिकेशन नहीं कराया है, वह 30 सितंबर तक अपने आईटीआर का वेरिफिकेशन करा सकते हैं।

कैपिटल गेन पर क्लेम - लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स से बचने के लिए लोगों को कुछ जरूरी निवेश करने होते हैं। सरकार ने इसकी आखिरी 30 सितंबर 2020 तय की हुई थी। सरकार ने कहा था कि 30 सितंबर 2020 तक किया गया निवेश या कंस्ट्रक्शन या फिर कोई खरीद पर कैपिटल गेन से डिडक्शन का फायदा उठाया जा सकता है। बता दें कि सेक्शन 54 के तहत ये फायदा मिलता है। उदाहरण के लिए अगर आपको कैपिटल गेन का फायदा घर बेचने से हुआ है, तो आप एक तय समय में दूसरा घर खरीद कर या फिर निर्धारित बॉन्ड में निवेश कर के डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं।

1 अक्टूबर से TCS को लेकर नया नियम लागू - एक अक्टूबर से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स (Tax Collected at Source) को लेकर नया नियम जारी किया है। नए नियम के मुताबिक, किसी भी ई-कॉमर्स ऑपरेटर को यह अधिकार दिया गया है है कि वह एक अक्टूबर से गुड्स और सर्विस सेल पर एक फीसदी का टीसीएस काटे। वित्त अधिनियम 2020 (The Finance Act, 2020) में इनकम टैक्स कानून 1961 में एक नई धारा 194-ओ जोड़ी गई है। इसके तहत ई- कॉमर्स ऑपरेटर को यह अधिकार दिया गया है कि एक अक्ट्रबर 2020 से उसके डिजिटल अथवा इलेक्ट्रॉनिक सुविधा अथवा प्लैटफॉर्म के जरिये होने वाले माल अथवा सेवा अथवा दोनों के कुल मूल्य पर एक फीसदी की दर से इनकम टैक्स लेना होगा।

विदेश पैसा भेजने पर लगेगा टैक्स - केंद्र सरकार ने विदेश पैसे भेजने पर टैक्‍स वसूलने से जुड़ा नया नियम बना दिया है। ऐसे में अगर आप विदेश में पढ़ रहे अपने बच्‍चे के पास पैसे भेजते हैं या किसी रिश्‍तेदार की आर्थिक मदद करते हैं तो रकम पर 5 फीसदी टैक्‍स कलेक्‍टेड एट सोर्स (टीसीएस) का अतिरिक्‍त भुगतान करना होगा। फाइनेंस एक्ट, 2020 के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की लिबरलाइज्‍ड रेमिटेंस स्‍कीम (एलआरएस) के तहत विदेश पैसे भेजने वाले व्‍यक्ति को टीसीएस देना होगा। एलआरएस के तहत 2.5 लाख डॉलर सालाना तक भेज सकते हैं, जिस पर कोई टैक्‍स नहीं लगता। इसी को टैक्‍स के दायरे में लाने के लिए टीसीएस देना होगा।


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