विज्ञान और तकनीक

EUCLID टेलिस्कोप पंहुचा अपनी कक्षा में

यूक्लिड यूरोपियन स्पेस एजेंसी का एक महत्वाकांक्षी मिशन है। इस मिशन में अंधेरे ब्रह्मांड की संरचना और विकास का पता लगाना है। इसका लक्ष्य आकाश के एक तिहाई से अधिक भाग में 10 अरब प्रकाश वर्ष तक की अरबों आकाशगंगाओं का अध्ययन करके अंतरिक्ष और समय में ब्रह्मांड का सबसे बड़ा, सबसे सटीक 3डी मानचित्र बनाना है। डार्क मैटर और डार्क एनर्जी हमेशा से ही वैज्ञानिको के लिए कुछ सबसे बड़े सवालो में से एक रही है। और अब तक इनको पढ़ने या खोजने का कोई कारगर तरीका या उपकरण वैज्ञानिकों के पास नहीं था। 

यूक्लिड यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और यूक्लिड कंसोर्टियम द्वारा विकसित नियर इंफ्रारेड अंतरिक्ष दूरबीन है। यूक्लिड मिशन का उद्देश्य ब्रह्मांड के अक्सेलरेशन को सटीक रूप से मापकर डार्क एनर्जी और डार्क मैटर को बेहतर ढंग से समझना है। डार्क एनर्जी को आम तौर पर फैलते ब्रह्मांड के बढ़ते अक्सेलरेशन में फ़ोर्स के रूप में देखा जाता है, इसलिए इस रिलेशन को समझने से यह एक्सपेरिमेंट करने में मदद मिलेगी कि भौतिक वैज्ञानिक इसे कैसे समझते हैं। मिशन का नाम प्राचीन ग्रीक गणितज्ञ यूक्लिड के नाम पर रखा गया है।

आपको हम गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग के बारे में भी बताते हैं। होता ये है कि पदार्थ की उपस्थिति के कारण प्रकाश किरणों के मुड़ने का एक परिणाम है जो स्थानीय रूप से स्पेस-टाइम के घुमाव को बदलता है। आकाशगंगाओं द्वारा उत्सर्जित प्रकाश दृष्टि की रेखा के साथ सामने आये हुए ऑब्जेक्ट के करीब से गुजरते हैं। यह मैटर आंशिक रूप से दिखाई देने वाली आकाशगंगाओं से बना है लेकिन यह ज्यादातर डार्क मैटर है। इस डेविएशन को मापकर, डार्क मैटर की मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का यूक्लिड अंतरिक्ष दूरबीन पृथ्वी से एक महीने की लंबी यात्रा के बाद सफलतापूर्वक अपनी गंतव्य कक्षा, सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंज बिंदु L2 पर पहुंच गया है। L2 पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर, सूर्य की विपरीत दिशा में स्थित है, जो इसे चंद्रमा से लगभग चार गुना दूर बनाता है।

अब बस इससे भी कुछ बेहद रोचक और रहस्यों से पर्दा उठने वाले तथ्यों पर हमारी नज़र बनी रहेगी और हम उन्हें आपसे साझा भी करते रहेंगे।

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