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साल दर साल कम हो रही सनई की खेती

समय के साथ गांवों में रस्सियों का उपयोग और सन का उत्पादन कम हो गया है। सनई की खेती साल दर साल कम हो रही है। दो दशक पहले तक जिले के सभी गांवों में लोग सनई की खेती करते थे। प्लास्टिक का उपयोग बढ़ने और कुंओं का उपयोग कम होने के बाद अब लोग सन की जगह प्लास्टिक की रस्सियां प्रयोग कर रहे हैं। किसानों ने सनई की खेती भी कम कर दी है। सरैया कनू के राम राज वर्मा ने बताया कि हम पहले अधिक खेती करते थे। इस बार दस विस्वा जमीन में सनई की खेती किए हैं। इस खेती में बहुत मेहनत होती है, इसलिए लोग अब इसकी खेती बंद कर चुके हैं।

भादर संवाद के अनुसार इस बार सनई की खेती कहीं नहीं दिख रही है। लोग सन उत्पादन के बजाय दूसरी फसलों की व्यवसायिक खेती कर रहे हैं। जगदीशपुर संवाद के अनुसार सनई की खेती क्षेत्र में कहीं भी नहीं हुई है। भेटुआ संवाद के अनुसार कस्तूरी पुर, बालीपुर और भीमी में तीन किसानों ने सनई की बुवाई की है।

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