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गेमिंग कंपनियां चोरी-छिपे भारत से विदेश भेजती हैं पैसा; टैक्स चोरी के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है

भारत में पुलिस विदेशी गेमिंग कंपनियों पर नकेल कसने में काफी हद तक थक चुकी है। ये कंपनियां भारत में कमाए गए पैसे को बाहर ले जाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर रही हैं। इसका परिणामस्वरूप, वे शेल फर्मों और अन्य साधनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे भारत सरकार को अरबों का नुकसान हो रहा है।

प्रशासनिक दखल और निगरानी के बावजूद, ऐसी गेमिंग कंपनियां अपने व्यवसायिक मॉडल को भारत से दूसरे देशों में छिपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का सहारा ले रही हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें कंपनियां भारतीय मुद्दों को दूर करने के लिए इस तकनीक का उपयोग कर रही हैं। ये गैरकानूनी प्रथाओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं, क्योंकि ये क्रिप्टोकरेंसी के बारे में कानूनी और साक्षात्कारिक पहचान को छिपाने का एक नया तरीका है।

एक प्रमुख ऑनलाइन गेमिंग कंपनी ‘पैरिमैच’ के मामले में, गुप्तीकरण और आवाजाही के अद्भुत तंत्र का इस्तेमाल किया गया था। यह कंपनी अपने संचारिक नेटवर्क के माध्यम से अपने कार्यक्रमों को भारत में छिपाती थी और फिर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर बाहर भेज देती थी। इसके परिणाम स्वरूप, यह नकद पैसे को दूसरे देशों में स्थानांतरित करने के लिए एक नए और गुमनाम तंत्र का निर्माण करती थी, जिससे कि इसका पता लगाना किसी भी साधारण प्रक्रिया के रूप में संभव नहीं था।

इन मामलों के संबंध में एक क्रिप्टो में बदले गए करीब 700 करोड़ रुपये के अंदरूनी ख़बरें आई हैं। यह धन उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया और बाहर भेज दिया था। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ गुड्स एंड सर्विस टैक्स (डीजीजीआई) की मुंबई टीम ने इस संदर्भ में सफलतापूर्वक कई नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इसके साथ ही, डीजीजीआई के अधिकारीगणों ने कुछ दिन पहले एक पेमेंट एग्रीगेटर कंपनी के निदेशक को भी गिरफ्तार किया था, जिसमें पैरिमैच के लिए कई नेटवर्क काम कर रहे थे। उनकी नज़रों में यह कंपनियां गैरकानूनी रूप से भारत में सट्टेबाजी और गेमिंग सेवाएं प्रदान कर रही थी, जिनमें कुछ कंपनियों ने पैरिमैच का उल्लेख भी किया था। यह धन भी क्रिप्टो में बदलकर दुबई और अन्य विदेशों में भेजा जाता था।

अधिकारियों ने इस तरीके के माध्यम से कुल मिलाकर 400 से ज़्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, लेकिन जांच में पता चला कि एक बड़ी राशि पहले ही यहाँ से बाहर भेज दी गई थी। एक मुंबई आधारित क्रिप्टो ऑपरेटर के अनुसार, करीब 96 करोड़ रुपये क्रिप्टो में बदले गए थे, लेकिन उनसे यह जानकारी नहीं मिली कि इस पैसे का मालिक कौन है और इसे बाहर भेजने का मकसद क्या था। वे बताते हैं कि इस बारे में किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन और ईमेल के जरिए उन्हें सूचित किया था।

इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इन घटनाओं की जांच कर रही है। कई शेल कंपनियां तो भारत में दिखाई देती हैं, लेकिन उनके कार्यालय और पंजीकरण विदेशों में होते हैं। यह विदेशी कंपनियों के लिए बड़ी आरामदायक सुविधा प्रदान करता है, क्योंकि भारतीय कर नियम उन पर लागू नहीं होते हैं। ऐसे मामलों में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल अधिकारियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है, क्योंकि वे इसका पता लगाने के लिए उपलब्ध तकनीक का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

इजरायल की कुछ कंपनियों ने क्रिप्टोकरेंसी पर नजर रखने के लिए उन्नत तकनीक विकसित की है, लेकिन वर्तमान मामलों में यह तकनीक का उपयोग संभाव नहीं है। यदि तकनीकी दृष्टिकोण से आगे की तरफ उन्नति होती है, तो यह अधिकारियों को इन मामलों के पीछे की बातों का पता लगाने में मदद कर सकता है; यह बात भी उन्होंने स्पष्ट की है।

संक्षिप्त में:

विदेशी गेमिंग कंपनियां भारत में कानूनी संरक्षण से बचकर अपने कारोबार को विदेशों में बढ़ाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का सहारा ले रही हैं। इस तरीके से पैसे को छिपाने की प्रक्रिया का उपयोग करते हुए उन्होंने भारतीय टैक्स नियमों को ताले देकर कर चोरी का काम किया है। न्यायिक और प्रशासनिक दलों ने इन मामलों की जांच के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी की गुमनाम और उन्नत तकनीकों के कारण उन्हें इन मामलों की पूरी जानकारी प्राप्त करने में दिक्कतें आ रही हैं। भविष्य में तकनीकी उन्नतियों से आशामंगल होने का संकेत है, जो इन निर्देशों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं।

FAQs:

क्या इन कंपनियों का गतिविधियों का निगरानी केंद्र भारत में है?

नहीं, इन कंपनियों के गतिविधियों का निगरानी केंद्र विदेशों में होता है, जो उन्हें भारतीय कर नियमों से बचाता है।

क्या क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग से उनका पता लगाया जा सकता है?

वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी की तकनीक उन्हें पता लगाने में सहायक नहीं है, लेकिन आगे की तकनीकों के साथ, यह संभाव हो सकता है।

क्या भारत सरकार ने इस समस्या का समाधान पाने के लिए कदम उठाए हैं?

जी हां, प्रशासनिक और न्यायिक दलों ने इस समस्या का समाधान पाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी के गुमनाम और तकनीकी तरीकों के कारण, यह काम बहुत कठिन है।

क्या इस समस्या का समाधान तकनीकी उन्नतियों से संभव है?

हां, यह संभव है कि तकनीकी उन्नतियों से इस समस्या का समाधान हो सके, जो आगे की तकनीकों के साथ इसे पता लगाने में मदद कर सकते हैं।

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