कवितायें और कहानियाँमनोरंजन

लक्ष्यकेंद्रित

लक्ष्य भी बदलते हैं और रास्तें भी बदलते हैं,
जब वक्त की आँधियाँ चलती हैं तो,
अपने भी बदलते हैं और
देखे गए सारे सपने भी बदलते हैं;

पर कुछ बिरले ही ऐसे होते हैं जो,
मुश्किलों की घड़ी में फौलाद बन के उभरते हैं,
कुछ अलग करने का जुनून होता है जिनके मन में,
ऐसे लोग दुनिया वालों को अक्सर नासमझ ही लगते हैं,

पर जो धुन के पक्के होते हैं अपने लक्ष्य को लेकर,
वो लोगों की परवाह किये बिना ही आगे बढ़ते हैं;
और निश्चय ही विजयी होकर, एक दिन
अपने परिवार और देश-दुनिया की तस्वीर बदलते हैं;

फिर एक समय ऐसा भी आता है जीवन में,
जब ईर्ष्या और विरोध करने वाले वे लोग ही;
उस लक्ष्यकेंद्रित विजयी व्यक्ति की
प्रशंसा, अनुसरण और अभिवादन करते हैं;

‘वक्त के साथ बदलना’ तो होता है लोगों का स्वाभाव,
पर जो कठिन परिश्रम से, अपने वक्त को बदलते हैं;
ऐसे ही लोग अपना नाम विश्व पटल पर,
स्वर्णाक्षरों में अंकित करके इतिहास बदलते हैं।
☆☆☆☆☆☆
—(Copyright@भावना मौर्या “तरंगिणी”)—

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button