परंपरा से बड़ा है कर्तव्य : जब भी बात फर्ज की आई तब-तब सीएम योगी ने इस परंपरा को तोड़ा

Medhaj News 2 Apr 20 , 06:01:40 Governance Viewed : 14 Times
yogi.png

गोरक्षनाथ पीठ के लिए नवरात्रि बेहद खास है | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पीठ के पीठाधीश्वर भी हैं | नवरात्रि के पहले दिन से ही गोरक्षनाथ मंदिर में अनुष्ठान शुरू हो जाता है | सारी व्यवस्था मठ के पहली मंजिल पर ही होती है | परंपरा है कि इस दौरान पीठाधीश्वर और उनके उत्तराधिकारी मठ से नीचे नहीं उतरते | पूजा के बाद रूटीन के काम और खास मुलाकातें ऊपर ही होती हैं | समापन नवमी के दिन कन्या पूजन से होता है | जिसे पीठ के उत्तराधिकरी या पीठाधीश्वर करते हैं | वर्षों से योगी आदित्यनाथ इस परंपरा को निभाते रहे हैं | इस बार कोरोना वायरस संक्रमण के कारण लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों के अनुपालन में उन्होंने कन्या पूजन भी नहीं किया | ऐसा पहली बार नहीं हुआ है | इसके पहले भी जब भी बात फर्ज की आई सीएम योगी  ने इस परंपरा को तोड़ा है | इस बार के अभूतपूर्व संकट में तो वह गोरक्षनाथ मंदिर गए ही नहीं | जहां रहे वहीं परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ किया | 30 सितम्बर 2014 की बात है | गोरखपुर कैंट स्टेशन के पास नंदानगर रेलवे क्रासिंग पर लखनऊ-बरौनी और मडुआडीह-लखनऊ एक्सप्रेस की टक्कर हुई थी |





रात हो रही थी | हल्की  ठंड भी पड़ने लगी थी | हादसे वाली जगह से रेलवे और बस स्टेशन की दूरी करीब 5-6 किमी की थी | हजारों यात्री थे | साधन उतने थे नहीं | लोगों का सामान और परिवार के साथ स्टेशन तक पहुंचना मुश्किल था | खास कर उनको जिनके साथ छोटे बच्चे और महिलाएं थीं | तब सीएम योगी गोरखपुर के सांसद हुआ करते थे | चर्चा होने लगी कि छोटे महाराज (उस समय लोग पूरे पूर्वांचल में प्यार से उनको यही कहते थे) आ जाते तो सब ठीक हो जाता | उनको सूचना थी ही, समस्या की गंभीरता से वाकिफ होते ही वर्षों की परंपरा तोड़कर वह मौके पर पहुंचे | साथ में उनके खुद के संसाधन और समर्थक भी पहुंचे | प्रशासन भी सक्रिय हुआ | देर रात तक सब सुरक्षित स्टेशन पहुंच चुके थे | यकीनन इस बार भी उनकी मेहनत रंग लाएगी और प्रदेश कोरोना के इस संकट से पार पा लेगा |


    0
    0

    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends

    Special Story