सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा बढ़ते पर्यावरण प्रदुषण को रोक पाने में नाकाम राज्यों पर क्यों न लगे जुर्माना

Medhaj News 25 Nov 19 , 06:01:39 Governance Viewed : 83 Times
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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा काफी नाराज दिखे। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए प्रदूषण के मालमे में छह सप्ताह जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया कि आखिर क्यों न राज्य सरकारों पर जनता को स्वच्छ हवा और साफ पानी न मुहैया कराने में असफल रहने पर जुर्माना लगा दिया जाएं।



दरअसल पराली जलाने की घटनायें कम नहीं हो रही है साथ ही कोहरे और धुंद का भी सामना करना पद रहा है। जिससे खुली हवा में सॉस लेना मुश्किल होता जा रहा है। जिसके चलते दिल्ली और उसके आस पास के इलाके गैस चेम्बर में तब्दील होते जा रहे है। ऐसे में दिल्ली में रहे बच्चों और बूढ़ों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।





दिल्ली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पीने का गंदा पानी सप्लाई करने पर स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के खिलाफ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने तल्खी भरे स्वर में कहा कि दिल्ली नरक बन गई है। कोर्ट ने दिल्ली के प्रदूषण के मालमे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगाने पर जोरदार फटकार लगाई और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रदूषण के चलते होने वाले नकुसान की एक डिटेल रिपोर्ट सौंपने को कहा है। साथ ही दिल्ली चलने वाली फैक्ट्री की भी रिपोर्ट मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र से अपने मतभेदों को दूर रखने और एक साथ बैठकर दिल्ली में एयर प्यूरीफायर लगाने के मामले में 10 दिन में प्लान तैयार करके कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। दिल्ली सरकार ने राज्य में डुअल पावर शेयरिंग की वजह से प्रदूषण के मामले में सुधार न होने की दलील दी।



 


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