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आजादी के लिए सबसे कम उम्र में फांसी का फन्दा चूमने वाले महान क्रांतिकारी: खुदीराम बोस

खुदीराम बोस आजादी के मतवाले तथा एक महान क्रांतिकारी थे, जिन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक बम विस्फोट में शामिल होने के लिए महज 18 साल 8 महीने और आठ दिन की उम्र में फांसी दी गई थी। उनका का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मिदनापुर में ही प्राप्त की और फिर 1906 में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया।

खुदीराम बोस ने कॉलेज में रहते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ना शुरू किया। वे 1907 में अनुशीलन समिति के सदस्य बन गए, जो एक क्रांतिकारी संगठन था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था। बोस ने समिति के लिए कई कार्य किए, जिनमें बम बनाना और ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला करना शामिल था।

1908 में, बोस और उनके साथी प्रफुल्ल चाकी को अलीपुर बम कांड में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया, इस कांड में एक अंग्रेज महिला और एक अंग्रेज बच्चे की मौत हो गई थी, खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी को अदालत ने दोषी ठहराया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। बोस को 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दी गई थी।

बोस का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए एक प्रेरणा थी, उन्होंने देशवासियों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया, बोस को आज भी एक महान क्रांतिकारी के रूप में याद किया जाता है।

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