नई दिल्ली स्टेशन पर कुलियों का हाल बेहाल, 1237 कुली थे अब 250 ही बचे

Medhajnews 2 Jul 20 , 17:45:38 Health Viewed : 1587 Times
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नई दिल्ली: देश में कोरोना के चलते अधिकतर लोगों को अपनी आय से हाथ धोना पड़ा है ऐसा ही कुछ हाल देश की राजधानी दिल्ली में लोगों का बोझ उठाने वाले मेहनतकश कुलियों की है। दिल्ली में अभी रोजाना कोरोना संक्रमण के दो हजार से ज्यादा नए मामले आ रहे हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि कुली अभी तक इससे बचे हुए हैं। पर बुरी बात है कि उन्हें अब काम नहीं मिल रहा है। इसके चलते उनके सामने खाने का संकट पैदा हो गया है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 1237 कुली काम करते हैं, जिसमें से फिलहाल 250 से 300 कुली ही इस वक्त मौजूद हैं। लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर कुली अपने घर चले गए थे, लेकिन अब धीरे धीरे वे स्टेशन पर फिर से काम करने के लिए लौट रहे हैं।

आपको जानकारी के लिए बता दे कि हाल ही में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का आधुनिकीरण भी हुआ है। ऐसे में कुलियों का यह भी मानना है कि यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट और एस्कलेटर की सुविधा दिए जाने की वजह से भी उनकी आमदनी पर पड़ा है। फिलहाल तो कोरोना के चलते ये लोग मुश्किल में हैं। संक्रमण से बचने के लिए यात्री अब अपना सामान खुद उठा कर ले जा रहे हैं। स्टेशन पर मौजूद एक अन्य कुली बताते हैं कि कितनी बार ऐसा होता है कि यात्री के पास पैसे नहीं होते, हम फिर भी उनका सामान उठाकर मदद करते हैं। हमें भी यात्रियों का दर्द समझ आता है, बस हमारा दर्द किसी को समझ नहीं आता।

एक कुली कहते हैं कि मैं 3 दिन पहले ही अपने घर से वापस आया हूं, सुबह से अभी तक बोहनी नहीं हो पाई है। रेलवे स्टेशन पर यात्री न होने की वजह से बहुत दिक्कत हो रही है। नई दिल्ली आने वाले यात्रियों की संख्या बहुत घट गई है। यहां से यात्री सिर्फ वापस ही जा रहे हैं। हम जब भी किसी यात्री का सामान उठाते हैं, उससे पहले हम सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं और सामान रखने के बाद साबुन से हाथ धोकर फिर प्लेटफार्म पर आते हैं।

एक कुली कहते हैं कि लॉकडाउन और कोरोना से पहले वे रोजाना 500 से 800 रुपए तक कमा लेते थे, लेकिन अब सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक 400 रुपए भी नहीं कमा पा रहे हैं। पूरा-पूरा दिन निकल जाता है, तब जाकर कुछ कमा पाते हैं। 40 किलो वजन के 100 रुपए मिलते हैं, ये सरकार की तरफ से निर्धारित है, बाकी यात्री के ऊपर है, अपनी तरफ से ज्यादा भी दे जाते हैं।

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