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समय की गर्त में खोता हुआ फिरोजाबाद जनपद का ऐतिहासिक चंद्रवार गेट

उत्तर प्रदेश के मनोरम फिरोजाबाद जनपद में स्थित, चंद्रवार गेट क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का एक उल्लेखनीय प्रतीक है। यह प्रतिष्ठित प्रवेश द्वार सदियों के इतिहास का साक्षी रहा है, यह शक्ति और भव्यता का प्रतिनिधित्व करता है।

फ़िरोज़ाबाद एक समय में चौहान राजपूतों का गढ़ था, जिसको चंद्रवार नाम से जाना जाता था। चंद्रवार के इतिहास को लेकर इतिहासकारो के अलग अलग मत है। कुछ इतिहासकारो ने चंद्रवार को श्री कृष्ण के पिता वासुदेव काल की नगरी बताया है। इसके बार में कहा जाता है कि चंद्रवार नगर की स्थापना चौहान वंश के राजा चन्द्रसेन चौहान ने दसवीं सदी में की थी। राजा ने उसे अपनी राजधानी बना कर आकर्षक महल का निर्माण कराया।

चंद्रवार के इतिहास में चंद्रवार के तीन राजाओं का उल्लेख मुख्य रूप से है 1.चंद्रसेन 2.चंद्रसेन का पुत्र चंद्रपाल 3. चंद्रपाल का पौत्र जयपाल। मुगल आक्रांता मुहम्मद गौरी ने चंद्रवार पर आक्रमण कर राजा चन्द्रसेन को पराजित कर दिया और महल पर अधिकार कर लिया। मुहम्मद गौरी ने तोपें चलाकर राजा के साम्राज्य को नष्ट कर दिया था। राजा चन्द्रसेन का महल आज खंडहर में तब्दील हो चुका है।

राजा चंद्रसेन के अस्तित्व को जीवित रखने के लिए उनके पुत्र चंद्रपाल ने नगर से करीब सात किलोमीटर दूर यमुना किनारे एक किला बनवाया जिसे चंद्रवार गेट या चंद्रवार किला कहा जाता है। चंद्रवार गेट, चंद्रवार नगर के प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता था। चंद्रवार गेट राजपूत राजाओं के शासन की निशानी हैं जो शासन की उदासीनता के कारण अब खंडहर बन चुका हैं। यह इस क्षेत्र के शानदार अतीत में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है जो एक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण बन गया है।

चंद्रवार गेट राजपुताना और मुगल स्थापत्य शैली के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण को प्रदर्शित करता है। शानदार संरचना जटिल नक्काशी, नाजुक झरोखों (बालकनियों) और अलंकृत मेहराबों से सुशोभित है, जो अपने समय की शिल्प कौशल का उदाहरण है। इस गेट पर वर्धमान चाँद के आकार के मेहराब है, जो सुंदरता और शांति का प्रतीक है। चंद्रावर गेट सांस्कृतिक गतिविधियों के जीवंत केंद्र के रूप में खड़ा है। आसपास के क्षेत्र में जीवंत बाजार और पारंपरिक बाजार हैं, जो विश्व प्रसिद्ध फिरोजाबाद ग्लासवर्क सहित स्थानीय शिल्प की झलक पेश करते हैं।

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