विज्ञान और तकनीक

लूनर लैंडर मॉड्यूल कैसे मून पर सॉफ्ट लैंड करते हैं?

मनुष्य का अगला कदम आकाश और खगोल अनुशासन की ओर बढ़ते हुए है, और इसका मून पर एक सॉफ्ट लैंडिंग मोड्यूल भेजना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मून पर लैंडिंग मोड्यूल को सॉफ्ट तरीके से भूमि पर लैंड कराने के लिए विशेष तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष अनुसंधानकर्ताओं को जानकारी और डेटा प्राप्त करने का मौका मिलता है। इस लेख में, हम जानेंगे कि मून पर लैंडर मॉड्यूल कैसे सॉफ्ट लैंड करते हैं।

मून पर सॉफ्ट लैंडिंग मोड्यूल भेजने के लिए अंतरिक्ष एजेंसियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पहली चुनौती यह है कि मून पर नीचे आने के बाद मोड्यूल को बिना किसी हानि के भूमि पर लैंड किया जाए। दूसरी चुनौती यह है कि लैंडिंग मोड्यूल को मून की थिन और अस्थिर ग्रैविटी में स्टेबल रूप से लैंड करना होता है।

इसके लिए, साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स ने कई तकनीकों का विकास किया है, जिन्हें सॉफ्ट लैंडिंग के लिए उपयोग किया जाता है। एक ऐसी तकनीक है ‘रेट्रोरॉफ्टिंग’। इसमें, मोड्यूल के पीछे एक प्रकार की प्रक्षेपण इंजन होता है, जिसका उपयोग लैंडिंग के पहले किया जाता है। यह इंजन मोड्यूल की गति को कम करने और उसे धीरे-धीरे बृद्धि करने में मदद करता है, जिससे वह सॉफ्ट लैंडिंग कर सके।

रेट्रोरॉफ्टिंग के अलावा, एक अन्य महत्वपूर्ण तकनीक ‘लैंडिंग गियर’ का होता है। यह गियर मोड्यूल के नीचे होता है और वैज्ञानिकों को सॉफ्ट लैंडिंग करने में मदद करता है। इसका उपयोग मोड्यूल को भूमि पर स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जाता है। लैंडिंग गियर में अमोनियम नाइट्रेट और अन्य धातुओं का उपयोग किया जाता है, जो तब तक फूलते हैं जब तक मोड्यूल भूमि पर पूरी तरह से नहीं लैंड कर जाता।

एक और महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘त्राजेक्टरी कोर्रेक्शन’। यह विशेष तरीके से पूर्व-पूर्व तय की गई मार्ग को सुधारने में मदद करता है। यदि मोड्यूल का गति और पाथ किसी भी कारणवश बिगड़ता है, तो त्राजेक्टरी कोर्रेक्शन उसे सही मार्ग पर लाने में मदद कर सकता है।

मून पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए एक और महत्वपूर्ण तकनीक ‘टरेन रेकग्निशन’ है। इसका उपयोग मून की सतह की छवियों को अंतरिक्ष यानी मोड्यूल के सेंसर्स के माध्यम से पूरी तरह से स्कैन करने में किया जाता है। इससे यह निश्चित होता है कि मोड्यूल उस स्थान पर लैंड होता है जो सुरक्षित और उपयुक्त है।

इन तकनीकों का संयोजन मून पर सॉफ्ट लैंडिंग को संभव बनाता है। जब मोड्यूल मून की सतह के करीब पहुंचता है, तो यह अपने रेट्रोरॉफ्टिंग इंजन का उपयोग करके अपनी गति को कम करता है। इसके बाद, लैंडिंग गियर का उपयोग किया जाता है ताकि मोड्यूल धीरे-धीरे भूमि पर लैंड कर सके। ट्राजेक्टरी कोर्रेक्शन से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मोड्यूल सही मार्ग पर है, और टेरेन रेकग्निशन से यह सुनिश्चित किया जाता है कि यह सुरक्षित जगह पर लैंड होता है।

इसके परिणामस्वरूप, मून पर सॉफ्ट लैंडिंग मोड्यूल अपनी मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है, और हमें मून के संदर्भ में महत्वपूर्ण डेटा और जानकारी प्राप्त करने का मौका मिलता है। इस प्रकार, सॉफ्ट लैंडिंग तकनीक मून के खोजने के सफर को और भी महत्वपूर्ण और सफल बनाती है।

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