वित्तीय प्रोफेशनल्स आत्मनिर्भर भारत अभियान के कर्णधार

Medhaj News 28 Sep 20 , 16:52:20 India Viewed : 3565 Times
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Ab Foundation की ओर से आयोजित "आत्मनिर्भर भारत अभियान में  वित्तीय प्रोफेशनल्स की भूमिका पर वेबीनार में गंभीर चर्चा की गई।

मुख्य वक्ता  Institute ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के पूर्व  प्रेसिडेंट सुबोध अग्रवाल  ने अपने संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भर भारत में एमएसएमई और तथा विश्व के बदलते संदर्भ में वित्तीय सलाहकारों को भी अपने कार्य में परिवर्तन तथा अपने आपको परिवर्तन के अनुरूप ढालने की आवश्यकता है। पूर्व प्रेजिडेंट इन सूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया श्री राकेश सिंह ने  कृषि एमएसएमई एवं धार्मिक पर्यटन की आत्मा पल भारत में  एक महत्वपूर्ण भूमिका की आवश्यकता पर बल दिया।

तीसरे वक्ता के रूप में  Institute आफ कंपनी सेक्रेट्रीज आफ इंडिया के पूर्व प्रेसिडेंट श्री रंजीत पांडेय ने कंपनी सेक्रेटरी की  कंपनियों में मुख्य भूमिका  की व्याख्या की उन्होंने यह बताया कि एक कंपनी सेक्रेटरी किसी भी संस्थान की स्थापना के साथ तथा उनके विघटन पूरी की पूरी प्रणाली में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है।  

वेबीनार के बतौर चौथे वक्ता के चार्टर्ड अकाउंटेंट और काउंसिल मेंबर आफ अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के रंजीत अग्रवाल ने बताया कि भारतवर्ष में कुल 25 लाख वित्तीय सलाहकार हैं जिनमे क्षमता है कि वे भारत को विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनाने की पूरी काबिलियत रखते है। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 40,000 भारतीय  वित्तीय सलाहकार विदेशों में अपनी सेवा दे रहे हैं तथा बड़ी-बड़ी कंपनियों के महत्वपूर्ण पदों पर स्थापित हैं।  उन्होंने विश्व को अपनी क्षमताओं से अवगत करवाया है उन्होंने यह बताया कि अगर हम अपने व्वित्त  सलाहकारों के टैलेंट को भारतवर्ष में रोक लेते हैं और उनकी क्षमताओं का अगर हम पूरा यूज़ करेंगे तो भारतवर्ष को आत्मनिर्भर भारत और नया भारत बनने से कोई रोक नहीं सकता है । 





कार्यक्रम के पांचवे एवं अंतिम स्पीकर के रूप मे  सेंट्रल  काउंसिल मेंबर दिल्ली के श्री राजेश शर्मा ने चार्टर्ड अकाउंटेंट की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला उन्होंने सारे चार्टर्ड अकाउंटेंट से सिंगल प्वाइंट सर्विस सेंटर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया उन्होंने यह भी बताया कि आप लोग अपनी अपनी फर्मों को बड़े फॉर्म में कन्वर्ट करके आने वाले वर्षों में कंपटीशन में कंपीट कर सकते हैं तथा उन्होंने एमएसएमई स्टार्टअप की भूमिका पर प्रकाश डाला इस बात की भी जानकारी दी कि  लॉकडाउन के दौरान सीए Institute  द्वारा जो कैंपस में सिलेक्शन किया गया है उसमें पिछले बरसों की तुलना में में 37% वृद्धि हुई है जो कि लाक डाउन के दौरान बहुत ही पॉजिटिव न्यूज़ है । 

कार्यक्रम के प्रारंभ में विषय की प्रस्तावना करते हुए एबी फाउंडेशन के मार्गदर्शक एवं मीडिया सलाहकार नेशन टुडे डाट काम के एडिटर इन चीफ श्री पदम पति शर्मा ने  बताया कि अनिल बोकील की अर्थक्रांति प्रस्तावना जिसमे समस्त कर प्रावधानों को समाप्त करके सिर्फ दो प्रतिशत बैंकिंग ट्रांजैक्शन टैक्स से देश को खुशहाली मिल सकती है। उन्होंने  वित्तीय सलाहकारों से चर्चा की तथा प्रोफेशनल शब्द की पिछले वर्षों से वर्तमान के परिपेक्ष में परिवर्तन की व्याख्या की वहीं संस्था के ट्रस्टी श्री c के मिश्रा जो खुद एक चार्टर्ड अकाउंटेंट है उन्होंने वित्तीय सलाहकारों की नए भारत और आत्मनिर्भर बनाने में भूमिका की आवश्यकता पर बल दिया। 

वेबीनार के मॉडरेटर की सफल एवं निरंतर भूमिका का निर्वाह कर रहे श्री रवि पांडे आईआईटी कानपुर के इनक्यूबेशन सेंटर से संलग्न है उन्होंने अपनी भूमिका को बखूबी निभाया |

अंत में एबी फाउंडेशन की ओर से वोट ऑफ थैंक्स मैसेज के माध्यम से कोलकाता के एडवोकेट श्री आनंद कुमार सिंह ने बताया कि आने वाले 10 वर्षों में भारत विश्व की नंबर वन अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा। उन्होंने फाउंडेशन के माध्यम से सारे वित्तीय सलाहकारों से निवेदन किया कि वह कम से कम 2 से 5  नए और छोटे उद्यमी जोकि माइक्रो स्मॉल तथा मीडियम उद्योग जगत से जुड़े हैं तथा  तथा जो नए हैं उन्हें मदद प्रदान करें। नॉलेज और अनुभव से आने वाले वर्षों में भारत वर्ष के लार्जेस्ट मैन्युफैक्चरर और लार्जेस्ट employer बन सकते हैं । उन्होंने यह निवेदन किया कि वित्तीय सलाहकार को अपने फैमिली तथा आसपास के लोगों की जो कि वित्तीय परेशानी से जूझ रहे हैं उनको वित्तीय चैलेंज से निकालने में रोल अदा करना चाहिए साथ ही साथ यदि उन्होंने सारे संस्थानों से निवेदन किया वो अपने प्रोफेशनल जो कि हाल ही में पास हुए हैं जो नए हैं तथा जो छोटी छोटी जगह में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्हें उनका उचित पारिश्रमिक कैसे मिले इसक एक रोडमैप संस्थानों को बनाना चाहिए। वरिष्ठ सलाहकार जो सीनियर सिटीजन हो गए हैं उनका  reskilling कैसे किया जाए इसकी आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।



आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत धार्मिक पर्यटन की भूमिका पर वेबिनार में गंभीर परिचर्चा


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