सूर्य षष्ठी के दिन अस्तगामी सूर्य को जल देने से क्या-क्या लाभ मिलता जाने

Medhaj News 31 Oct 19 , 06:01:39 India Viewed : 59 Times
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भगवान सूर्य की पूजा करने और हर रोज अर्घ्य देने से ना केवल स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है बल्कि उनको नमस्कार करने से सभी देवताओं को नमस्कार हो जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि कार्तिक के पवित्र महीने में सूर्य को अर्घ्य देने से पूरे साल सूर्योपासना का फल प्राप्त होता है। इस महीने की षष्ठी तिथि को अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य देने से सुख-संपदा की भी प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि सूर्य षष्ठी के दिन अस्तगामी सूर्य को जल देने से क्या-क्या लाभ मिलता है… सूर्य सत्ता के कारक ग्रह माने जाते हैं।





जो जातक सरकारी क्षेत्र में काम करते हैं और उनको प्रमोशन मिलने में दिक्कते आ रही हैं, उनको कार्तिक मास में सूर्य को जल और अर्घ्य देना चाहिए। सूर्य को विजय और प्रतिष्ठा का भी कारक भी माना गया है। जो व्यक्ति कोर्ट-कचहरी के मामले में फंसे हुए हैं उनको विजय पाने के लिए सूर्योपासना करना चाहिए। अगर जातक का सरकारी क्षेत्र में बहुत दिनों से कोई काम अटका हुआ है तो उनको सूर्य की पूजा करनी चाहिए।





सूर्य छठ व्रत करना इस कार्य के लिए उत्तम माना गया है। सूर्य नेत्र के कारक माने गए हैं। नेत्र की ज्योति के लिए अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य देना अच्छा माना गया है। साथ ही इससे चर्म रोग की परेशानी भी दूर होती है। सूर्य का संबंध गायत्री माता से भी है और गायत्री माता बुद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं। सूर्य को अर्घ्य देने से बौद्धिक क्षमता विकसित होती है। आयुर्वेद के अनुसार, कमर तक जल में प्रवेश करके सूर्य को देखते हुए अर्घ्य देने से अपच और दूसरे कई प्रकार के रोगों से रक्षा होती है। यही कारण है कि डूबते और उगते हुए दोनों समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।


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