कविता - प्रेम में नवाचार 2

Medhaj news 1 Jul 20 , 23:26:39 India Viewed : 3006 Times
poem2.png

सबकी अपनी अपनी चिंता

मेरी निशदिन चिंता तुम।

उजली आग में मैंने देखा 

मेरी पराधीनता तुम ।


तुम कविता के बन्ध से बाहर_

वेगमयी पावन सरिता;

अखिल विश्व की पीड़ाओं में

मेरी विकल कथा हो तुम।


इक सुंदर , संगीत अनोखा,

नई रागिनी नीरव सी_

मेरा जीवन निपट अमावस

मेरी एकल आभा तुम।


तुम अभिनव सौंदर्य अनुपम

वाणी की अद्भुत प्रतिमा ;

कवि कल्पित सुमधुर छंदों सी

मेरी नव परिभाषा तुम।


सबकी अपनी अपनी चिंता

मेरी निशदिन चिंता तुम।

 

----अजय शंकर त्रिपाठी(शोध छात्र)------


    41
    0

    Comments

    • हृदय स्पर्श.! आभार आपका

      Commented by :Rahul Kiran
      08-07-2020 17:12:21

    • बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति, बधाई हो आपको

      Commented by :?????? ????????
      03-07-2020 12:51:21

    • Nice poem

      Commented by :Mahendra Singh
      02-07-2020 13:48:52

    • बहुत सुंदर कविता मित्र

      Commented by :?????? ????? ??????
      02-07-2020 10:17:56

    • Nice poem

      Commented by :Vartika Mishra
      02-07-2020 10:05:20

    • Nice

      Commented by :Sameer Siddiquee Almora
      02-07-2020 09:52:32

    • Nice poem

      Commented by :Amit Kumar
      02-07-2020 09:36:09

    • Nice poem

      Commented by :Sudha
      02-07-2020 09:06:45

    • Nice poetry

      Commented by :Ajay Kumar Azad
      02-07-2020 06:44:32

    • Great lines

      Commented by :Mani Shankar
      01-07-2020 23:53:15

    • खूबसूरत अभिव्यक्ति

      Commented by :Bhawana Maurya
      01-07-2020 23:32:25

    • Load More

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends

    Special Story