कविता - 'मातृ-भूमि के वीर'

Medhaj news 13 Aug 20 , 00:11:12 India Viewed : 8743 Times
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जब भी सूरज उगता है, दुनिया के हर कोने-कोने में उजाला होता है | 

जब तक मातृ भूमि को चूमे नहीं वीर, तब तक चैन इन्हे नहीं आता है | 

इस मिटटी पर जान लुटा जाने वाला, हर एक -एक आर्मी नगीना होता है | 

ऐसी किस्मत कहा किसी को मिलती है, वतन पर अपनी जान लुटाने को,


बस इसी बात को मन में सोच कर, इस देश के हर निवासी को गर्व होता है |


हमने बहुत ही सुनी कहानिया थी, जब रण में तुमने हुंकार भरी थी |

जर्रा -जर्रा थहर गया, साँस भी गयी सहम देख होसला ये हुंकार की,

जिनकी हर साँस हो देश के नाम, जिनका कर्म रहा हो बस धूल चटाना,

जिनकी जीत बने जीवन(#life) का मंतव्य
, जिनका चाहत बस हो देश की शान बढ़ाना,

ऐसी किस्मत  कहा किसी को मिलती है वतन पर अपनी जान लुटाने को,

बस इसी बात को मन में सोच कर इस देश के हर निवासी को गर्व होता है |


खौलता हुआ रंग जिनके सीने में, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव वाला है | 

दुश्मन क्या धूल चटा पायेगा,  जिनके ह्रदय का लहू उफान लेने वाला है | 

शेखर सुभाष
 असफाक की धरा पर कभी क्रांति का प्रवाह न रुकने वाला है | 

इस मातृ-भूमि पर पैदा होना ही हर एक को क्रांति सहज सुख देने वाला है | 

ऐसी किस्मत कहा किसी को मिलती है, वतन पर अपनी जान लुटाने को,

बस इसी बात को मन में सोच कर, इस देश के हर निवासी को गर्व होता है |



-----अजय (H.O)------



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