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जल्लीकट्टू तमिलनाडु की संस्कृति का हिस्सा, यह गलत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायलय की संवैधानिक पीठ ने तमिलनाडु के परम्परागत खेल जल्लिकट्टु पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु की संस्कृति तथा विरासत का हिस्सा है तथा इसमें कुछ भी गलत नहीं है, SC ने जल्लीकट्टू पर तमिलनाडु सरकार द्वारा बनाये गए कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला सर्वसम्मति से सुनाया इस पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति एम जोसफ ने की, पीठ ने तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र में आयोजित होने वाली बैलगाड़ी दौड़ को भी वैध बताया इस संविधान पीठ में न्यायमूर्ति एम जोसफ के अलावा अनुरुद्ध बोस, ऋषिकेश रॉय, रवि कुमार तथा अजय रस्तोगी थे।

क्या है जल्लीकट्टू

जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक परम्परागत खेल है इसमें एक सांड को प्रतिभागियों के बीच छोड़ा जाता है तथा जो प्रतिभागी सांड को काबू कर लेता है वह विजेता घोषित किया जाता है यह तमिल फसल उत्सव पोंगल के समय आयोजित किया जाता है, जल्लीकट्टू का इतिहास लगभग 2500 वर्ष पुराना है।

2014 में SC ने लगाई थी जल्लीकट्टू पर रोक

पशुओं के साथ नैतिक व्यवहार के पक्षधर लोग (पेटा) ने जल्लीकट्टू पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर बैन लगा दिया था जिसके बाद कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई 2018 में SC ने इस मामले को संविधान पीठ को भेजा जिसका फैसला अब आया है।

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