जानिये क्या हैं International World Tribal Day ? और क्यों हैं इसमें सभी को ध्यान देने की जरुरत ?

क्या आपने कभी स्वदेशी जनसंख्या का अंतर्राष्ट्रीय दिवस के बारे में सुना है? जो 9 अगस्त को मनाया जाता हैं, ये स्वदेशी लोगों को समर्पित है, जो पूरे विश्व में फैले हुए हैं, लेकिन धीमे धीमे लुप्त होते जा रहे हैं इसे अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस भी कहा जाता हैं। ये मुख्य धारा से दूर जंगलों-पहाड़ो में रहने वाली स्वदेशी जनसंख्या के लोगो के बारे में हैं। आदिवासी समूह को अगर मूल निवासी कहा जाये तो ये भी गलत नहीं होगा, क्योंकि वो पहले से उस जगह में रह रहे हैं। और आज भी वहीँ हैं, वो प्रकृति और अपनी जगह से प्रेम करते हैं।

ये जनजातियाँ अपने घटते संसाधनों के कारण गरीबी से पीड़ित

पारंपरिक ड्रेस में आदिवासी समुदाय के लोग

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया भर के 90 देशों में मूल निवासियों की संख्या लगभग 476 मिलियन है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इन आदिवासी लोगों के पास अद्वितीय संस्कृतियाँ, परंपराएँ, भाषाएँ और उनकी अपनी ज्ञान प्रणालियों की व्यापक विविधता है। उनका अपनी भूमि के साथ एक रिश्ता है और उनके अपने विश्वदृष्टिकोण और प्राथमिकताओं के आधार पर विकास के विविध दृष्टिकोण भी हैं। अपनी रूढ़िवादिता और दूरदराज के क्षेत्रों के प्रति प्रेम के कारण, ये जनजातियाँ और उनके सदस्य न केवल आधुनिक सुविधाओं से अपरिचित हैं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार उनकी भूमि, क्षेत्रों और संसाधनों पर केंद्रीय सरकारों का अंतिम अधिकार भी है। ये लोग, जो दुनिया की आबादी का 6.2% हैं, भी अपने घटते संसाधनों के कारण गरीबी से पीड़ित हैं।

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हमें आपको और सरकार को इन जनजातियों के बारे में सोचने की जरुरत

इस समय पूरी दुनिया में इनकी भागीदारी एक खतरनाक स्थिति का सामना कर रही है। जिसमे , भूमि कब्ज़ा, अवैध वनों की कटाई या उन्हें उनकी ही जगह से निष्काषित करना शामिल हैं। जो किसी को अपने ही घर से निकलने के समान हैं , जिस वजह से इनके साथ भी अपराध और हिंसा में वृद्धि हुई है। जो काफी निन्दनीय हैं, हमें आपको और सरकार को इन जनजातियों के बारे में सोचने की जरुरत हैं। जिस करण आज भी प्रकति जिन्दा हैं हमारे भारत में आज भी इस तरह की काफी जनजातीय पायी जाती हैं।

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