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भद्रा में रक्षा सूत्र क्यों नहीं बांधते हैं?

व्याख्या –भाद्रपद मास (भद्रा महीना) में हिन्दू पंचांग के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में रक्षा बंधन का आयोजन नहीं किया जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि भाद्रपद मास में कई मान्यताओं और धार्मिक आदर्शों के आधार पर रक्षा सूत्र बांधने से बचा जाता है।

सावन पूर्णिमा को रक्षा बंधन का त्योहार मनाने की प्रथा भारत में व्यापक रूप से प्रचलित है, लेकिन भाद्रपद मास में यह पर्व किसी क्षेत्रों में नहीं मनाया जाता है। इसका मुख्य कारण निम्नलिखित है:

पितृ पक्ष: भाद्रपद मास में पितृ पक्ष भी होता है, जिसमें पितरों की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस समय अन्त्येष्टि और पितृ तर्पण की प्रथा अधिक महत्वपूर्ण होती है और इस दौरान रक्षा सूत्र बांधने से बचा जाता है।

ग्रह दोष: भाद्रपद मास में विशेष ग्रह दोषों के कारण रक्षा सूत्र बांधने से बचा जाता है। इस मास में किसी क्षेत्रों में मन्यताओं के आधार पर ग्रहों के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए इसे नहीं किया जाता है।

पूजा-पाठ: भाद्रपद मास में विशेष तरीके से भगवान विष्णु की पूजा करने का अवसर होता है, जिसके लिए विशेष पूजा-पाठ किया जाता है। इस समय भक्ति और पूजा के अन्य आदर्शों के चलते रक्षा सूत्र बांधन से बचाया जाता है।

इस प्रकार, भाद्रपद मास में कुछ क्षेत्रों में रक्षा सूत्र बांधन की प्रथा नहीं होती है ताकि विभिन्न धार्मिक और आधार्मिक आदर्शों का पालन किया जा सके। इसी कथा की वजह से भद्रा काल में शुभ कर्म वर्जित माने गए हैं। भद्रा काल में पूजा-पाठ, जप, ध्यान आदि किए जा सकते हैं।

शास्त्रों में भद्रा का स्वभाव भी शनि की तरह ही बताया गया है। भद्रा काले वर्ण, लंबे केश, बड़े दांत वाली तथा भयंकर रूप वाली एक कन्या है। जन्म लेने के कुछ ही समय बाद भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी थी, भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन कहा जाता हैं।

जानिये कौन हैं भद्रा ?

इस वर्ष राखी 31 अगस्त 2023 को मनाई जाएगी क्योंकि 30 अगस्त 2023 को पूरे दिन भद्रा रहेगी और रात्रि 09:00 बजे के बाद भद्रा समाप्त हो जाएगी और इस समारोह को रात के समय में मनाना अशुभ नहीं माना जाता है।

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