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गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र का भारत में विलय होना तय ?

ईशनिंदा -एक ऐसा शब्द है जिसकी आड़ में पाकिस्तान या अन्य मुस्लिम देश में कसी की भी हत्या करना आसान हो जाता है फिर बेशक वो निंदा हो या नहीं, जबकि ईश को समझना मुश्किल है। पाकिस्तान में ईशनिंदा एक हथियार है किसी को मारने का या दबाने का। ऐसा यही पकिस्तान में हुआ। ईशनिंदा कानून के तहत एक शिया मौलवी बाकिर अल-हुसैनी की गिरफ्तार कर ली गई वह एक धार्मिक सभा में बोल रहे थे जिसकी गूंज पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र तक सुनाई दी और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह विरोध प्रदर्शन इस क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है. विरोध प्रदर्शन के दौरान “चलो, चलो कारगिल चलो” के नारे लगे और स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तानी प्रशासन को गृहयुद्ध की चेतावनी दी और कुछ ने तो भारत में विलय की मांग भी कर दी।

शिया और सुन्नी इस्लाम के समान बुनियादी सिद्धांतों को साझा करते हैं, लेकिन शिया उन इस्लामी हस्तियों को अपना आदर्श नहीं मानते जिन्होंने चौथे खलीफा अली का विरोध किया था। पाकिस्तान एक सुन्नी-बहुल देश है लेकिन गिलगित-बाल्टिस्तान में बड़ी संख्या में शिया मुस्लिम रहते हैं। जनरल जिया-उल हक के शासनकाल से ही पाकिस्तानी सरकार ने इस सुन्नी बहुल क्षेत्र को निशाना बनाने की लगातार कोशिश की और  गिलगित-बाल्टिस्तान की जनसांख्यिकीय संरचना को बदलने का भी प्रयास किया। गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को प्रशासनिक रूप से तीन प्रभागों में विभाजित किया गया है – बाल्टिस्तान, डायमर और गिलगित। मुख्य प्रशासनिक केंद्र गिलगित और स्कर्दू शहर हैं। हालांकि पाकिस्तानी मीडिया में गिलगित में विरोध प्रदर्शन का कोई कवरेज नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए हैं, जो दिखाते कि विरोध प्रदर्शन कितने बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। हालांकि इसमें से अधिकांश को सत्यापित नहीं किया जा सकता है।

22 अगस्त शिया समुदाय ने आगा बाकिर अल-हुसैनी की गिरफ़्तारी के बाद पर्वतीय क्षेत्र को पाकिस्तान से जोड़ने वाले काराकोरम राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया था। विरोध डेमर में हुए थे, जहां सुन्नी बहुसंख्यक है। विरोधियों ने पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के खिलाफ नारे लगाए। वीडियो में स्थानीय नेताओं को यह कहते हुए भी सुना गया कि यदि सड़क मार्ग अवरुद्ध रहा, तो लोग पंजाब (पाकिस्तान के) या सिंध नहीं, बल्कि कारगिल जाएंगे। जिसे गिलगित के भारत में विलय के एक संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अल-हुसैनी को रिहा करने और राजमार्ग को फिर से शुरू करने की मांग की है और चेतावनी देते हुए कहा है कि मांगें पूरी नहीं हुई तो गृह युद्ध हो सकता है।

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