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सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजन का विधान

सावन महीने को भगवान शिव को समर्पित करने का विशेष महत्व होता है और इस महीने में शिवलिंग की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। पार्थिव शिवलिंग पूजन का विधान शिव पुराण के अनुसार निर्धारित होता है, जिससे शिवभक्त इस पवित्र महीने में इस धार्मिक कार्य का अनुसरण कर सकते हैं।

पार्थिव शिवलिंग बनाने की विधि:

पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए शुद्ध मिट्टी को ध्यान से ढोकर एक लिंगाकार आकृति बनाएं। आप इसे सांसेदार मिट्टी से या शिव पुराण के अनुसार प्राप्त विशेष मिट्टी से बना सकते हैं। शिवलिंग के आकार सरल और सुंदर होना चाहिए।

शिवलिंग के ऊपर तृणमय अवर्तन करें, जो शिव की विशेष पूजा के लिए उपयुक्त होता है।

शिवलिंग को सजाने के लिए चंदन, बिल्वपत्र, धूप, दीप, अखंड दिया, फूल और पुष्पांजलि लगाएं।

इसके बाद, शिवलिंग के आगे बैठकर शिव पुराण और शिव भजनों का पाठ करें और भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करें।

पार्थिव शिवलिंग पूजन का विधान:

पार्थिव शिवलिंग का पूजन सावन महीने के पूजा-पाठ के दौरान किया जाता है। इसे सुबह-सवेरे के समय करना शुभ माना जाता है।

पार्थिव शिवलिंग को प्रणाम करें और अपनी इच्छाएं मन में संकल्पित करें।

शिवलिंग पर चंदन, कुमकुम, और भस्म लगाएं। इसके बाद शिवलिंग को फूल, बेलपत्र, धूप, दीप, फल, मिश्री और पुष्पांजलि से सजाएं।

प्रतिदिन कुछ समय इस शिवलिंग की पूजा और ध्यान करने का प्रयास करें। इससे आपके आत्मा को शांति मिलती है और जीवन में समृद्धि और सफलता के मार्ग में मदद मिलती है।

सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजन के विधान का पालन करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है और जीवन की समस्त मुश्किलें दूर होती हैं।

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