विज्ञान और तकनीक

मील का पत्थर पार हो गया! पृथ्वी की कक्षा से बाहर गिरने के बाद ‘आदित्य’ उपग्रह ‘एल-1’ बिंदु की ओर बढ़ गया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी, इसरो, ने अपने ‘आदित्य एल-1’ मिशन के साथ एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिया है। आदित्य उपग्रह ने पृथ्वी की कक्षा को पार करते हुए अब ‘एल-1 बिंदु’ की ओर अपनी यात्रा तेजी से जारी की है। इस नई उपलब्धि के साथ, भारत ने अंतरिक्ष में अपने प्रतिष्ठान को और भी मजबूत किया है। आइए जानते हैं, इस मिशन की नई जानकारी के बारे में:

आदित्य एल-1: नई उड़ान की शुरुआत

आदित्य एल-1 मिशन की यात्रा का आगाज, 19 सितंबर को सुबह 2 बजे, ट्रांस लैग्रेन्जियन पॉइंट-1 इंसर्शन पैंटरेबाज़ी के सफल सम्पन्न होने के साथ हुआ। इसरो ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस बड़ी उपलब्धि की सूचना दी। इसके बाद, आदित्य उपग्रह ने अपनी यात्रा की शुरुआत की है, और उसका लक्ष्य है ‘एल-1 बिंदु’ पर पहुंचना।

दुर्गम यात्रा की सूचना

एल-1 बिंदु, पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आदित्य उपग्रह को इस दूरी को कवर करने में लगभग 110 दिन लगेंगे। इसके बाद, जब यह बिंदु के पास पहुंचेगा, तो एक और महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा।

युद्धाभ्यास: आदित्य को लैंग्रेंज बिंदु में स्थापित करने का प्रयास

110 दिनों के बाद, जब आदित्य उपग्रह ‘एल-1 बिंदु’ के करीब पहुंचेगा, तो एक और युद्धाभ्यास किया जाएगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से, आदित्य को लैंग्रेंज बिंदु की कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जो उसके निरंतर सूर्य के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हमें सूर्य के रहस्यमय विश्व के प्रति और भी अधिक जानकारी मिलेगी।

इसरो की अद्वितीय प्राप्ति

इसरो की इस नई प्राप्ति से साबित होता है कि यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी का प्रतिष्ठान और भी बढ़ गया है। इसरो ने पहले ही चंद्रयान और मंगलयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों में सफलता प्राप्त की है, और आदित्य एल-1 मिशन भी उनकी अद्वितीय उपलब्धियों का हिस्सा है। आदित्य उपग्रह के माध्यम से, इसरो ने अब तक पृथ्वी की कक्षा से सफलतापूर्वक पांच बार किसी उपग्रह या वस्तु को अंतरिक्ष में बाहर भेजा है।

आदित्य एल-1 मिशन: सूर्य की ओर एक नई कदम

आदित्य एल-1 मिशन का मुख्य उद्देश्य है सूर्य के अध्ययन का संशोधन करना। इसके लिए इसरो ने ‘लैग्रेंज प्वाइंट एल1’ पर ‘आदित्य’ नामक सैटेलाइट स्थापित किया है। सूर्य का अध्ययन करने के लिए एक निश्चित समय सीमा होती है, और इसमें कई बाधाएँ आती हैं। लेकिन ‘एल-1 बिंदु’ से, ‘आदित्य’ बिना किसी रुकावट के 24×7 सूर्य का अवलोकन कर सकेगा।

डेटा संग्रहण की आरंभिक प्रक्रिया

इसरो की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, आदित्य सैटेलाइट पर लगे सात पेलोड में से STEPS उपकरण ने भी अपना काम शुरू कर दिया है। इस उपकरण के सेंसरों ने पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले सुपर-थर्मल और ऊर्जावान आयनों और इलेक्ट्रॉनों को मापना शुरू कर दिया है। यह डेटा वैज्ञानिकों को पृथ्वी के चारों ओर कणों के व्यवहार का विश्लेषण करने में मदद करेगा।

निष्कर्षित डेटा के महत्व

इस मिशन से आदित्य सैटेलाइट के द्वारा जुटाए गए डेटा का विश्लेषण वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे हमें सूर्य की गतिविधियों, तापमान, और अन्य गुप्त रहस्यों का पता चलेगा, जो अंतरिक्ष के आदित्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्षित डेटा का महत्व

इस मिशन से आदित्य सैटेलाइट के द्वारा जुटाए गए डेटा का विश्लेषण वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे हमें सूर्य की गतिविधियों, तापमान, और अन्य गुप्त रहस्यों का पता चलेगा, जो अंतरिक्ष के आदित्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।

समापन

इसरो का ‘आदित्य एल-1’ मिशन भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से हमें सूर्य के रहस्यमय जगत के और भी अधिक जानकारी प्राप्त होगी और इससे अंतरिक्ष के अद्वितीय रहस्यों की खोज में मदद मिलेगी।

Read more….घने जंगल में मिल जाएगा जीपीएस, बच जाएगी बैटरी! iPhone में होगी इसरो द्वारा विकसित ये तकनीक!

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button