इस फ‍िल्म में दीपक और इरफान की जोड़ी ने कमाल क‍िया

Medhaj News 12 Mar 20,21:51:09 , 06:01:40 Movies Review Viewed : 38 Times
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इरफान खान (Irrfan Khan) हिंदी सिनेमा के उन सितारों में से हैं जो जब भी पर्दे पर आते हैं, एक जादू सा करते हैं | अक्‍सर उनकी फिल्‍में देखते वक्‍त दर्शक ये भूल जाते हैं कि वो इरफान को पर्दे पर देख रहे हैं क्‍योंकि वो अपने किरदार को कुछ ऐसा जिंदा कर देते हैं | इरफान खान ने अपनी अदाकारी का यही जादू फिर से दिखाया है अपनी आने वाली फिल्‍म 'अंग्रेजी मीडियम' (Angrezi Medium) में, निर्देशक होमी अदजानिया की 'अंग्रेजी मीडियम' इरफान खान की ही पिछली फिल्‍म 'हिंदी मीडियम' (Hindi Mediam) का अगलाभाग है | ये फिल्‍म शुक्रवार को रिलीज हो रही है | जानिए कैसी है ये फिल्‍म (Angrezi Medium Review in Hindi) |





कहानी: फिल्‍म की कहानी है चंपक बंसल (इरफान खान) और उनकी बेटी तारिका (राधिका मदान) की जो राजस्‍थान के रहने वाले हैं | तारिका बचपन से ही लंदन जाने का सपना देखती है और हमेशा अपने पापा से पूछती है कि 'हम लंदन कदी जाएंगे | इसके इस सवाल को उसके पापा 'जाएंगे बेटा जाएंगे..' कहकर टालते रहते हैं लेकिन तारिका का ये सपना धीरे-धीरे उसकी जिंदगी का मकसद बन जाता है | वहीं चंपक बंसल और उसके चचेरे भाई (दीपक डोबरियाल) में अपने परदादा घसीटाराम के नाम को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है | इस कानूनी लड़ाई के बाद भी ये दोनों भाई हर कदम पर एक-दूसरे के साथ खड़े हैं | तारिका को लंदन जाने का मौका उसके स्‍कूल से ही मिल जाता है लेकिन उसके पिता कुछ ऐसी गड़बड़ कर देते हैं कि तारिका के सपने पर बन आती है | यहां से शुरू होती है इस पिता की जंग जो अपनी बेटी को लंदन की टॉप की यूनिवर्सिटी में एडमिशन कराने के लिए सबकुछ करने को तैयार हो जाता है | हिंदी मीडियम' में एक ऐसे मां-बाप की कहानी दिखाई गई थी जो अपनी बेटी का एडमिशन प्राइमरी स्‍कूल में कराना चाहते थे | लेकिन 'अंग्रेजी मीडियम' में ये जिम्‍मा उठाते हैं अकेले इरफान खान, जो इस फिल्‍म में एक सिंगल पैरेंट बने हैं | फिल्‍म का फर्स्‍ट हाफ काफी मजेदार है | कई सीन्‍स में आप दिलखोलकर हसेंगे |  सेकंड हाफ भी दिलचस्‍प है लेकिन कुछ जगह फिल्‍म की पकड़ ढीली सी लगती है |





कहानी आगे बढ़ ही नहीं रही है | लेकिन परफॉर्मेंस के दम पर ये आपको बोर नहीं होने देगी | परफॉर्मेंस की बात करें तो एक राजस्‍थानी मिठाईवाले व्‍यापारी के किरदार से लेकर एक बड़ी होती बेटी के पिता तक, इरफान के इस किरदार में कई शेड्स हैं और उन्‍होंने अपने किसी भी हिस्‍से को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ा है | अपनी भाषा से लेकर अपने पहनावे और हर तरीके से आप उन्‍हें बस चंपक बंसल के तौर पर ही देखेंगे | उनके इस सफर में उनका पूरा-पूरा साथ दिया है दीपक डोबरियाल ने, जिन्‍हें देखकर मजा ही आ जाता है | इन दोनों का किरदार ऐसे भाइयों का है, जो अपने परदादा के नाम के लिए लड़ रहे हैं लेकिन साथ बैठकर रात में शराब पीते हैं | बेटी के किरदार में राधिका मदान ने अच्‍छा काम किया है | विदेश जाने के सपने के लिए कुछ भी करने और फिर 'कूल' बनने लिए लंदन में पढ़ाई करने के हर भाव को उन्‍होंने खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है | फिल्‍म में एक्‍टर्स की भरमार है | जैसे पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) का पूरी फिल्‍म में बस एक ही सीन है लेकिन उन्‍होंने उस सीन में भी कमाल किया है | इसके अलावा कीकू शारदा (Kiku Sharda), करीना कपूर (Kareena Kapoor), डिंपल कपाड़‍िया, रणदीप शौरी जैसे कई सितारे हैं जिनके छोटे लेकिन अहम किरदार हैं | निर्देशक होमी अदजानिया को इस बात का क्रेडिट मिलना चाहिए कि उन्‍होंने सभी एक्‍टरों का बखूबी इस्‍तेमाल किया है | बाप-बेटी की इस कहानी में काफी ड्रामा हो सकता था लेकिन इरफान ने इसे कहीं भी ड्रामा बनने नहीं दिया | सब-कुछ दिल को छू लेने वाला है | 


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