मुंबई-पारबंदर एमटीएचएल आर्थिक समृद्धि लाने वाली परियोजना : मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

मुंबई-पारबंदर एमटीएचएल परियोजना से आर्थिक तेजी आएगी तथा यह तीसरा गेम चेंजर साबित होगा। इससे मुंबई की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बदल देगा’। पारबंदर यानी मुंबई हार्बर लिंक (एमटीएचएल) निर्माणाधीन परियोजना के निरिक्षण के बाद, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सहारना कि ।

मुंबई पारबंदर परियोजना (एमटीएचएल) के तहत महत्वाकांक्षी समुद्री पुल का मुख्य भूमि के साथ जोड प्रकल्प का उद्घाटन बुधवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में किया गया। वे इस समारोह में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा, जो इस परियोजना की आधारशिला रख रहे हैं और जो इस परियोजना को पूरा करने में अपना पूरा सहयोग देंगे। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का रास्ता एमटीएचएल से होकर गुजरेगा।

इस अवसर पर सांसद राहुल शेवाळे, नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव भूषण गगराणी, एमएमआरडीए के आयुक्त एस.वी.आर. श्रीनिवास, मुंबई में जापान के वाणिज्यिक दूतावास के प्रमुख डॉ. फुकहोरी यासुकाता, “जाएका” के भारत प्रमुख, इवा मोतो, परियोजना को आकार देने के लिए एल एंड टी, देवू, एईसी के इंजीनियर, तकनीकी अधिकारी, कर्मचारी, मजदूर आदि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि यह परियोजना पूरी होने वाली है। हिंदू ह्रदय सम्राट बाळासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि राजमार्ग की तरह इस परियोजना का भूमिपूजन और लोकार्पण एक साथ होगा। इन दोनों परियोजनाओं का भूमिपूजन जब फडणवीस मुख्यमंत्री थे तब आयोजित किया गया था, और इसका उद्घाटन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना मुंबई, नवी मुंबई और रायगढ़ जिले की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बदलने वाली है। इस समुद्री पुल को साकार करना एक बड़ी चुनौती थी। यह पुल आगे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और मुंबई-गोवा मार्ग को जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि इससे शैक्षिक, औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों का विकास होगा।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, हमने राज्य में किसी भी परियोजना को ठप नहीं होने दिया है। मुंबई में मेट्रो परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया । इससे करोड़ों यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध हुईं। कोविड के समय में भी MTHL का काम शुरू था। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो पाया है। इसके लिए जिन लोगों ने इस परियोजना को पूरा करने में योगदान दिया है, उनकी सराहना की जानी चाहिए। इस परियोजना से ईंधन की बचत होगी। प्रदूषण पर रोक लगेगी। इस परियोजना को पूरा करते हुए पर्यावरण संतुलन का खयाल रखा गया है । इसके लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है।

महाराष्ट्र की ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था मार्ग एमटीएचएल से – उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस समुद्री पुल को इंजीनियरिंग का चमत्कार माना जाएगा। मुंबई शहर वित्तीय, वाणिज्यिक और मनोरंजन राजधानी है। लेकिन द्वीप जैसे इलाके ने इसके विकास को सीमित कर दिया। इस पुल ने इन मुश्किलों को दूर कर दिया है। अब माना जा रहा है कि महाराष्ट्र की ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का रास्ता MTHL से होकर गुजरेगा। पिछले पैंतीस साल से ऐसा ब्रिज सिर्फ चर्चा में था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुशी है कि अब यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और समर्थन से पूरा हो रहा है।

मुंबई परबंदर एमटीएचएल परियोजना के बारे में ..

मुंबई से मुख्य भूमि तक देश के सबसे लंबे और अनोखे, पहले समुद्री पुल का निर्माण जमीन और समुद्र पर 22 किलोमीटर तक पूरा हो गया है। इस प्रकार, मुंबई परबंदर परियोजना के पैकेज 1 और पैकेज 2 प्रत्येक में 65 से 180 मी. ऑर्थोट्रोपिक स्टील डेक ओएसडी सुपरस्ट्रक्चर के साथ लंबाई में कुल 70 स्पैन का निर्माण किया गया है। यह निर्माण कार्य अनूठी तकनीकों, गतिविधियों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पूरा किया गया है। साथ ही इस तीसरे चरण में पानी के ऊपर बने इस पुल को अब जमीन से जोड़ दिया गया है।

एमएमआरडीए ने बताया कि अन्य सहायक सुविधाओं,सड़क और यातायात सुरक्षा उपायों के पूरा होने, विभिन्न तकनीकी पहलुओं को पूरा करने, सूचना बोर्डों के सौंदर्यीकरण के बाद यह पारबंदर परियोजना नवंबर 2023 तक पूरी तरह से यातायात के लिए खोल दी जाएगी।

इस परियोजना में मुंबई शहर में शिवड़ी और मुख्य भूमि पर न्हावा शेवा को जोड़ने वाला लगभग 22 किमी लंबा 6 स्तरीय (3+3 लेन 2 आपातकालीन लेन) पुल शामिल है।

. इस पुल की लंबाई करीब 16.5 किमी है और लैंड ब्रिज की कुल लंबाई करीब 5.5 किमी है।

. यह पुल मुंबई शहर में शिवडी के पास और मुख्य भूमि पर शिवाजी नगर और राष्ट्रीय राजमार्ग -4 बी पर चिरले गांव पर इंटरचेंज है।

परियोजना के ला

· नवी मुंबई और रायगढ़ जिले का भौतिक और आर्थिक विकास।

· नवी मुंबई हवाई अड्डे के लिए तेज़ कनेक्टिविटी, साथ ही मुंबई पोर्ट और जवाहरलाल नेहरू भाग के बीच तेज़ कनेक्टिविटी।

· मुंबई और नवी मुंबई, रायगढ़, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और मुंबई-गोवा राजमार्ग के बीच की दूरी लगभग 15 किमी कम हो गई है, जिससे ईंधन, परिवहन लागत और कीमती समय में लगभग एक घंटे की बचत हुई है।

· यह मुंबई शहर में यातायात की भीड़ को कम करने में मदद करेगा

परियोजना की विशेषताएं

· यह भारत का सबसे लंबा और दुनिया का 10वां समुद्री पुल होगा ।

· भारत में ऑर्थोट्रोपिक स्टील डेक डीएसडी (Orthotropic Steel Deck DSD) तकनीक का पहला प्रयोग ।

· लगभग 500 बोइंग 747 विमानों के वजन के बराबर लगभग 85,000 मीट्रिक टन यूओट्रोपिक स्टील का परियोजना में उपयोग ।

· परियोजना में लगभग 170 हजार मीट्रिक टन स्टील बार का उपयोग किया गया है, जो 17 इफेल टावरों के वजन के बराबर है।

· पृथ्वी के व्यास का 4 गुना यानी करीब 48 हजार किमी लंबा प्रीस्ट्रेसिंग तारों का इस्तेमाल।

· लगभग 977,000 क्यूबिक मीटर कंक्रीट स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के लिए उपयोग किए जाने वाले कंक्रीट की मात्रा का छह गुना है।

· बुर्ज खलीफा की ऊंचाई का 35 गुना यानी करीब 35 किलोमीटर लंबा पाइल लाइनर्स का इस्तेमाल।

· वर्तमान में निर्माण कार्य 94 प्रतिशत पूरा हो चुका है।

· परियोजना से प्रभावित लोगों का प्राधिकरण के माध्यम से पुनर्वास किया गया है और मछुआरों को सरकार की नीति के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है।

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