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मेरी पहचान-एक खोज

मेरी पहचान-एक खोज

मनुष्य जब छोटा होता है तो वह जल्दी वयस्क होना चाहता है पर बड़े होने पर जब वह जीवन के विभिन्न अनुभवों और जिम्मेदारियों के बोझ से रूबरू होता है तो उसे अपने बचपन के वो अनमोल दिन याद आते हैं और तब उसे एहसास होता है कि वो पल अब वो कभी नहीं जी पायेगा। बहुत कुछ या फिर सब कुछ होते हुए उसे कुछ खालीपन सा महसूस होता रहता है जिसे वो शायद कभी भर नहीं सकता अपना सब कुछ खर्च करके भी। पर फिर भी किसी उम्मीद के सहारे वो आगे बढ़ने की कोशिश करता रहता है ताकि दुनिया की भीड़ में खुद में ही, खुद को खोज सके और बीते दिनों को वापस नहीं ला सकता तो क्या हुआ अपने लिए नयीं यादें तो बना सकता है। अपने अस्तित्व को बचा सकता है। ऐसा ही कुछ मैं यहाँ कहने की चेष्टा की है, शायद आप भी सहमत हों….

अपना अस्तित्व खो दिया हमने
सभी रिश्ते निभाते-निभाते;

मेरी पहचान-मेरी जिन्दगी अब धूमिल सी हो गयी है,
जीवन के इस पड़ाव पर आते-आते,

सोच के चले थे, कि इक मुकाम होगा अपना,
पर खो गये दुनिया की भीड़ में सबको हँसाते-हँसाते;

याद आ रहा है उस गुजरे बचपन का जमाना,
जब बड़ी खुशी मिलती थी रेत के आशियाने बनाने में,

मम्मी – पापा से रूठने में औैर फिर,
उनके बार-बार मनाने में,

आज वो बीते दिन बहुत याद आते हैं,
चलो पुरानी यादों में कही खो जाते हैं,

शायद उसमें खो कर कोई रास्ता मिल जाये,
खोई हुई पहचान फिर से वापस मिल जाये,

माँ-बाबा की सीख पर फिर से अमल कर लें,
अपना अधूरे जीवन को सफल कर लें,

फिर शायद अपने भविष्य को…..
कुछ सिखा पाये हम,

हमारी गलतियों को उनके द्वारा,
दोहराने से बचा पाये हम,

जीवन के संघर्षों से वो न घबरायें,
और उनके लिये मजबूत आधार बना पाये हम;

चलो फिर से दूँढ़ते हैं, अपने खोये हुए अस्तित्व को,
कुछ बेहतर बनाये अपने आने वाले भविष्य को,

ताकि फिर कभी अपनी पहचान खोने का कोई गम ना हो,
हम अपनी मंजिल को पाये, पर उस मुकाम पर कोई अहम् न हो।
★★★★★
—(Copyright@भावना मौर्य “तरंगिणी”)—

(नोट:- मेरे द्वारा लिखी गयी ये पहली कविता थी जो मेधज न्यूज़ पर 14.05.2016 को प्रकाशित हुई थी। आज फिर से इसे प्रकाशित करते समय मुझे वो समय याद आ गया क्योंकि इसके बाद ही मुझे समझ आया कि मैं लिख सकती हूँ और मुझे राइटिंग को सीरियसली लेना चाहिए। और उसके बाद आज तक तकरीबन मैं 180 से अधिक कवितायेँ और 6 कहानियाँ लिख चुकी हूँ और मेरी इस यात्रा में मेधज न्यूज़ का भी अहम् योगदान है।)


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