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सोशल मीडिया पर फर्स्ट क्लास की कविता पर विवाद के बाद एनसीईआरटी ने सफाई दी

नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने एनसीईआरटी की पहली कक्षा की हिंदी की पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित एक कविता को लेकर सोशल मीडिया पर  उठे विवाद के बाद अपना स्पष्टीकरण दिया है। एनसीईआरटी ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है कि इन कविताओं को स्थानीय भाषाओं को  स्थानीय भाषा के  बच्चों तक पहुँचाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शामिल किया गया है ताकि सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया जा सके। पूरा मामला ऐसा है कि रिमझिम में लिखी गई प्रथम श्रेणी की कविता में 'आम की टोकरी' शीर्षक वाली इस कविता में सिर पर आमों की टोकरी लिए छह साल की बच्ची के लिए 'छोकरी' शब्द (लड़की के लिए जो की एक अपमानजनक शब्द है) इस्तेमाल किए जाने पर सोशल मीडिया पर यूजर्स भड़क गए। वहीं इसको   'बाल श्रम' को बढ़ावा देना भी बताया जा रहा है. इस वजह से इस कविता की आलोचना  हो रही है. इस विषय पर आईएएस अवनीश शरण ने भी सोशल मीडिया पर आवाज उठाई। कई अन्य लोगों ने  कविता को अश्लील बताकर इस पर सवाल उठाया है। इस बाबत एनसीईआरटी ने इसके पक्ष में दो ट्वीट किए। NCERT ने एक आधिकारिक जवाब में ट्वीट किया कि, "इन कविताओं को बच्चों के लिए स्थानीय शब्दावली को सुलभ बनाने के NCF-2005 के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पाठ्यपुस्तक में दी गई कविताओं के संदर्भ को शामिल किया गया है।" सीखने को रोचक बनाने के लिए किया गया है। एनसीईआरटी ने अपने अगले ट्वीट में लिखा है कि, "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में एक नए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।" इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा के आधार पर भविष्य में पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएंगी।

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