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उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में राजसी ठाठ से निकली बाबा महाकाल की सवारी

उज्जैन | सावन का पवित्र महीना हिन्दुओं (Pious month of Sawan) के लिए भोले नाथ शिव शंकर (Lord Shiva) की उपासना का सबसे उत्तम समय होता है।देश में भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंग हैं।  इन्ही में से एक है उज्जैन का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaaleshwar Jyotirlinga)। 

सावन के पहले सोमवार को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी उज्जैन (ujjain) में बाबा महाकाल की सवारी निकाली गई। महाकाल राजसी ठाठ-बाट से अपनी प्रजा को दर्शन देने और हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। 

मान्यता है कि बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए शहर भ्रमण पर निकलते है। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार श्रावण मास पर विषेष सवारी निकली जाती है, पहले सोमवार के भी सवारी निकली, इस सवारी में बड़ी संख्या में भक्तगण षामिल हुए।

सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान के श्री मनमहेश स्वरुप का पूजन-अर्चन मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष द्वारा किया गया। पूजन पश्चात भगवान श्री मनमहेश की पालकी को मंदिर के पुजारी, पुरोहित आदि ने कन्धा देकर नगर भ्रमण के लिये रवाना किया।

मंदिर के मुख्य द्वार पर पुलिस बल के जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) के पश्चात सवारी ने परिवर्तित मार्ग से रामघाट की ओर प्रस्थान किया। भगवान महाकालेश्वर की सवारी हरसिद्धि मन्दिर के पास से, झालरिया मठ के सामने से होकर रामघाट पहुंची। नवीन सवारी मार्ग को आकर्षक वंदनवार से सजाया गया था। रामघाट पहुंचने पर पं.आशीष पुजारी एवं पुरोहितों द्वारा भगवान महाकाल का शिप्रा जल से अभिषेक किया गया। रामघाट से सवारी हरसिद्धि मन्दिर के सामने से होकर महाकालेश्वर मन्दिर पहुंची।