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प्राकृतिक सौंदर्य का है खजाना Chitrakoot Waterfall, करेंगे रोमांचकारी अनुभव, पढ़िए ये है Story

प्राकृतिक सौंदर्य का है खजाना Chitrakoot Waterfall, करेंगे रोमांचकारी अनुभव, पढ़िए ये है Story

रायपुर | छत्तीसगढ़ ( Chhattisgarh Tourism ) प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना है। यहां की खूबसूरत झरने पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। ऐसा ही एक जिला है बस्तर ( Bastar ) जो प्रकृति के असली सौंदर्य को अपने रोम-रोम में समेटे हुए है। यहां पर जंगलों के बीच इतने झरने हैं, जहां आज भी पर्यटक पहुंच नहीं पाए हैं। यहां की संस्कृति, सभ्यता, आदिवासियों का रहन-सहन अपने आप में ही अनूठा है, लेकिन जो लोग बस्तर को नहीं जानते उन्हें यहां सिर्फ लाल आतंक यानी नक्सलियों का साया ही नजर आता है। 


समय के साथ-साथ बस्तर के वो राज भी खुल रहे हैं, जो इतने दिलचस्प और रोचक है कि उसे एक्सप्लोर करने दूसरे राज्यों से भी घुमक्कड़ी कहें या फिर रमता जोगी यहां पहुंच ही जाते हैं। बस्तर के 16 श्रृंगारों में से एक है चित्रकोट जलप्रपात (  Chitrakote Waterfall ) । यह वॉटरफॉल, 90 फीट की ऊंचाई से गिरता ये झरना इंद्रावती नदी ( Indravati River ) की खूबसूरती पर चार चांद लगा देता है। देशभर में ये जलप्रपात नियाग्रा फॉल के नाम से भी जाना जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको जगदलपुर पहुंचना होगा। यहां से केवल 40 किलोमीटर दूर आपको प्राकृतिक सौंदर्य का ये अनोखा और मनमोहक संगम नजर आएगा। 




यहां पर घूमने का सबसे रोमांचकारी अनुभव


यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा समय मानसून ( Monsoon ) का होता है, क्योंकि इन दिनों इंद्रावती नदी अपने उफान पर होती है। चित्रकूट जलप्रपात देश का सबसे चौड़ा वाटरफाल है। बारिश के मौसम में इसकी चौड़ाई 150 मीटर होती है। रात की खामोशी में झरने की आवाज आपको 3 से 4 किलोमीटर दूर भी सुनाई देगी। मानों पानी की हर एक बूंद चीख-चीख कर चित्रकूट से गिरने की गौरवगाथा का गान कर रही हो। चित्रकोट वॉटरफॉल वैसे तो हर मौसम में दर्शनीय है, लेकिन बारिश के दिनों में इसे देखना अधिक रोमांचकारी अनुभव होता है। चित्रकोट जलप्रपात के आसपास घने जंगल हैं जो उसकी प्राकृतिक सौंदर्यता को और बढ़ा देती है।




दुनिया भर में मशहूर है यहां की हसीन हाट-बाजार 


बस्तर के जलप्रपात जितने खुबसूरत हैं। उतने ही हसीन यहां के हाट-बाजार ( Bastar Haat-Bazaar ) भी है। जहां आदिवासियों की कला-संस्कृति की छटा दिखाई पड़ती है। भारत के आदिवासी कलाओं में बस्तर की आदिवासी परंपरागत कला-कौशल काफी प्रसिद्ध है। बस्तर अपने अद्वितीय कलाकृतियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।




बस्तर के आदिवासी समुदाय पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी इस दुर्लभ कला का संरक्षण करते आ रहे हैं, लेकिन प्रचार के आभाव में यह केवल उनके कुटिरों से साप्ताहिक हाट बाजारों तक ही सीमित है।