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दिल्ली सरकार का बयान, यमुना का पानी नहाने लायक नहीं

नई दिल्ली| किसी समय में दिल्ली की लाइफलाइन रही यमुना नदी का जलस्तर बेहद खराब हो चुका है। आलम ये है कि नदी का पानी नहाने लायक भी नहीं रहा है। ये कहना है दिल्ली सरकार का। दिल्ली सरकार ने सोमवार को कहा कि न्यूनतम पर्यावरणीय जल प्रवाह न होने के कारण यमुना नदी नहाने लायक नहीं रह सकती।


केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, दिल्ली सरकार ने कहा है कि दिल्ली में यमुना में प्रदूषित पानी को पतला करने के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह नदी में स्नान के लिए वांछित पानी की गुणवत्ता के स्तर को पूरा करने के लिए आवश्यक होगी।


दिल्ली सरकार ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में से 22 एसटीपी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा निर्धारित अपशिष्ट जल मानक को भी पूरा नहीं करते हैं।


दिल्ली भर के औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित 13 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में से केवल छह डीपीसीसी के मानकों का अनुपालन करते हैं। दिल्ली सरकार की रिपोर्ट में कहा गया है, कि दिल्ली में यमुना के न्यूनतम प्रवाह के अभाव में स्नान की गुणवत्ता के मानक को हासिल करना बहुत मुश्किल है।


डीपीसीसी की एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में यमुना 22 किमी से अधिक की दूरी पर बहती है, वजीराबाद से ओखला तक, जो इसकी कुल लंबाई के दो प्रतिशत से भी कम है, और प्रदूषण भार का लगभग 80 प्रतिशत है। दिल्ली के शाहदरा, नजफगढ़ और बरहपुल्लाह नालों सहित सीवरेज का पानी ले जाने वाले लगभग 18 प्रमुख नाले जल प्रदूषण का प्रमुख स्रोत रहे हैं।


डीपीसीसी के अनुसार, दिल्ली प्रतिदिन लगभग 720 मिलियन गैलन सीवेज उत्पन्न करता है जिसका उपचार 35 एसटीपीएस में किया जा रहा है।