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तलाकशुदा बेटी को भी है माता-पिता की फैमिली पेंशन पर हक : कैट

तलाकशुदा बेटी को भी है माता-पिता की फैमिली पेंशन पर हक : कैट

तलाक के बाद बेटी अपने माता—पिता की फैमिली पेंशन की हकदार है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने यह कहा है। महिला (बेटी) के हक में फैसला देते हुए कैट ने फैमिली पेंशन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों और नियमों को भी स्पष्ट किया है।


केंद्र सरकार और उत्तर रेलवे ने दलील दी थी कि माता-पिता की मौत के बाद तलाक का फैसला होने पर बेटी फैमिली पेंशन पाने की हकदार नहीं होती है। हालांकि कैट ने इन दलीलों को सिरे से ठुकरा दिया है। 


बतौर कैट के सदस्य मोहम्मद जमशेद, तलाक का फैसला होने में कई सालों का वक्त लगता है, ऐसे में माता-पिता के जीवन काल में तलाक लेने वाली बेटी को पेंशन की हकदार मानना अनुचित है। हालांकि बस यह देखना होगा कि माता-पिता के जीवित रहने के दौरान तलाक की प्रक्रिया शुरू हुई हो। 


यह टिप्पणी करते हुए कैट ने रेलवे से याचिकाकर्ता अनिता को उसकी मां की मौत के बाद फैमिली पेंशन देने का आदेश दिया है।


कैट ने कहा कि इस मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता ने पारिवारिक विवाद के चलते अपनी मां के जीवित रहने के दौरान ही अदालत में तलाक के लिए याचिका दाखिल की थी। मरने से पहले उसकी मां ने अपनी सभी चल-अचल संपत्तियों का वारिस अपनी बेटी को ही घोषित किया था। इन्हें ध्यान में रखते हुए बेटी अपनी मां की मौत के बाद फैमिली पेंशन पाने की हकदार है।


कैट ने इसके साथ ही रेलवे के दिसंबर, 2018 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि चूंकि याचिकाकर्ता का तलाक उसकी मां की मौत के बाद हुआ है, इसलिए उसे फैमिली पेंशन नहीं दी जा सकती है।


बता दें कि याचिकाकर्ता अनिता के पिता उत्तर रेलवे में नौकरी करते थे। साल 1994 में उनकी मौत हो गई थी। अनुकंपा के आधार पर याचिकाकर्ता की मां को रेलवे में नौकरी मिल गई। अनीता की साल 2010 में शादी हुई। जुलाई, 2014 में उसने हरियाणा की एक अदालत में पति से तलाक लेने के लिए मुकदमा दाखिल किया। साल 2015 में अनीता के तलाक का फैसला आने से पहले उसकी मां की मौत हो गई। अपनी और अपने बच्चे की आजीविका के लिए उसके पास कुछ नहीं था, तो उन्होंने रेलवे में प्रतिवेदन देकर तलाकशुदा बेटी होने के आधार पर फैमिली पेंशन की मांग की थी।  



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