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क्या आपको पता है कि स्वास्थ्य है क्या ?

क्या आपको पता है कि स्वास्थ्य है क्या ?

दोस्तों स्वास्थ जीवन इस सुखद जिंदगी का आधार है। लेकिन क्या आपको पता है की आखिर स्वास्थय किस चिड़िया का नाम है।  अक्सर बिमारी रहित जीवन को ही स्वास्थ जीवन समझ लिया जाता है।  और बहुत हद तक ये सही भी है लकिन इसके कई और पैमाने हैं जो मिलकर स्वास्थय कहलाते हैं। अगर शाब्दिक अर्थ पर जाएँ तो,  होता है शांत चित्त या फिर आरोग्य। 


चिकित्सकीय रूप से देखा जाए तो बीमारी मुक्त होना ही स्वस्थ होना मन जाता है। लेकिन भारतीय संस्कृति में तन यानी की शरीर और मन यानी की आत्मा को एक माना गया है और इन दोनों के स्वस्थ होने पर ही इंसान पूरी तरह से स्वस्थ कहलाता है।  ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब की इंसान शारीरिक रूप से तो पूर्णतः स्वस्थ होता है लेकिन मानसिक रूप से परेशान रहता है।  ऐसे में वह स्वस्थ कैसे हो सकता है। क्योंकि वह अपने भीतर किसी भी तरह से स्वस्थ महसूस नहीं कर रहे होते हैं। 


इसी लिए पूर्ण रूप से स्वास्थ होने के लिए ज़रूरी है तन और मन दोनों का स्वस्थ होना। दुनिया की कई संस्कृतियों में मन की ऊर्जा या एनर्जी की बात की गई है।  इस ऊर्जा से मनुष्य बेहद स्वस्थ और खुश महसूस कर सकता है।  


अब किया जा सकता है।  इसका सबसे सरल उपाय है योग।  जी हाँ योग के द्वारा न सिर्फ शरीर को लचीला और स्वास्थ बनाया जा सकता है बलि मानसिक रूप से भी ये आपको ताकत प्रदान करता है। 


आजकल की अत्याधुनिक जीवन शैली में थोड़ा समय निकालकर  यदि योगाभ्यास किया जाए तो ये आपके सम्पूर्ण स्वास्थय के लिए वरदान साबित हो सकता है। योग में सबसे आसान लें सबसे जतिन क्रियाओं में से एक है ध्यान। 


ध्यान का अर्थ है अपनी साँसों, अपने आसपास की ऊर्जा और परम पिता परमेश्वर के बारे में सोचना।  सारे नकारात्मक विचारों का त्याग और सुख और स्वस्थ विचारों को अपने अंदर लाने का प्रयास करना।  

 

इन सकारात्मक विचारों से शरीर की ऊर्जा को संतुलित किया जाता है जिससे कई गहन बीमारियों को बिना किसी दवा के ठीक किया जा सकता है। आप ध्यान के द्वारा अपने शरीर में जो भी रासायनिक स्तर पर हो रहा है, उसे नियंत्रित केर सकते हैं। इसके लिए अपनी ऊर्जा को एक खास तरह से सक्रिय करना होता है जिसे योग के द्वारा सीखा जा सकता है। 


आइये अब आपको ध्यान करने का सही तरीका बताते हैं :


ध्यान करने के लिए कुछ बुनियादी बातों पर ध्यान देना होता है जैसे की - 

श्वास की गति 

मानसिक हलचल को समझना 

ध्यान करने का लक्ष्य 


श्वास की गति : योग में श्वास की गति को एक अति आवश्यक तत्व के रूप में मान्यता दी गई है। इसी से हम भीतरी और बाहरी दुनिया से जुड़े हैं। अक्सर मन और मस्तिष्क के द्वारा श्वास की गति ज्यादा संचालित होती है। जैसे क्रोध और खुशी में इसकी गति में भारी अंतर रहता है। ऐसी मान्यता है की श्वास की गति से ही हमारी आयु घटती और बढ़ती है। श्वास को नियंत्रित करने से सभी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसीलिए श्वास क्रिया द्वारा ध्यान को केन्द्रित और सक्रिय करने में मदद मिलती है। ध्यान करते समय जब मन अस्थिर होकर भटक रहा हो उस समय श्वसन क्रिया पर ध्यान केन्द्रित करने से धीरे-धीरे मन और मस्तिष्क स्थिर हो जाता है और ध्यान लगने लगता है। 


मानसिक हलचल : ध्यान करने के लिए मन और मस्तिष्क की शांत करना पड़ता है , उसे भटकने से रोकना होता है और सभी नकारात्मक विचारों को त्यागना पड़ता है।  तभी इन सभी के प्रति सजग होने के बाद मानसिक हलचल को शांत किया जा सकता है। इसके लिए कुछ उपाय हैं- जैसे की आंखें बंद कर स्वास पैर ध्यान केंद्रित करें। शरीर को स्थिर रखें । किसी भी प्रकार के विचार के प्रति सजग हो जाएँ। 


ध्यान का प्रयोजन:


ध्यान कई प्रकार से किया जा सकता है, इसके कई स्वरुप हैं।  अपनी ज़रूरत और परिस्थिति के हिसाब  से ध्यान किया जान चाहिए। ध्यान करते समय अपने विचारों की किसी एक बिंदु या चीज पैर केंद्रित करेने से योग सहज हो जाता है। 


इन सभी बातों को ध्यान में रेख केर रोज़ाना अपने लिए 10 मिनट का समय निकालने से ही आप मानसिक रूप से स्वास्थ और शक्तिशाली होते हैं।  साथ ही नियमित योग करने से शरीर रोग मुक्तहोता है यानि की सही मायने में आप स्वास्थय लाभ करते हैं।


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