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यूरोपीय संघ ने की इंडो-पैसिफिक रणनीति की घोषणा, चीन के डर को दूर करने की कोशिश

यूरोपीय संघ ने की इंडो-पैसिफिक रणनीति की घोषणा, चीन के डर को दूर करने की कोशिश

ब्रसेल्स | यूरोपीय संघ (European Union) ने गुरुवार को इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) में अपनी उपस्थिति बढ़ाने और चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए ताइवान के साथ एक व्यापार समझौते की मांग करने और समुद्री मार्गों को खुले रखने के लिए अधिक जहाजों को तैनात करने के लिए एक औपचारिक रणनीति (ormal strategy in the Indo-Pacific) तैयार की घोषणा की है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल (EU's foreign policy chief Josep Borrell) ने जोर देकर कहा कि रणनीति चीन के लिए भी खुली थी, खासकर जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में, लेकिन भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान के साथ गहरे संबंध बीजिंग की शक्ति को सीमित करने के उद्देश्य से थे।

यूरोपीय संघ (EU) की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक और रक्षा अस्तित्व को बढ़ाने के लिए नई रणनीति में टकराव की मांग किए बिना इस क्षेत्र के सभी सदस्यों के साथ सहयोग करने का निश्चय किया है। इंडो-पैसिफिक में सहयोग के लिए यूरोपीय संघ की रणनीति पर अपनाए गए संयुक्त संचार के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (Indo-pacific region) का बढ़ता आर्थिक, जनसांख्यिकीय और राजनीतिक वजन इसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में एक प्रमुख खिलाड़ी मानता है, ।

यूरोपीय संघ इस क्षेत्र के साथ अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है, ताकि नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को सु²ढ़ किया जा सके, वैश्विक चुनौतियों का समाधान किया जा सके और दीर्घकालिक समृद्धि पैदा करने वाले तीव्र, न्यायसंगत और टिकाऊ आर्थिक सुधार की नींव रखी जा सके।

यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेफ बोरेल ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ब्लॉक कोई टकराव नहीं बल्कि सभी के साथ सहयोग की मांग करेगा, और रणनीति इस क्षेत्र के सभी अभिनेताओं के लिए समावेशी है।

बोरेल ने बाद में जारी एक बयान में कहा कि दुनिया का गुरुत्वाकर्षण केंद्र भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से इंडो पैसिफिक की ओर बढ़ रहा है। ईयू और इंडो-पैसिफिक का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि हमारी भागीदारी का उद्देश्य सभी के लिए एक स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक बनाए रखना है, जबकि हरित संक्रमण, महासागर शासन और डिजिटल एजेंडे से लेकर सुरक्षा और रक्षा तक के मामलों में सहयोग करने के लिए मजबूत और स्थायी साझेदारी का निर्माण करना है।

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