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2047 तक ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा देश: राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा

2047 तक ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा देश: राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा

सार 
2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा भारत 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘देश की प्रगति और आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अनिवार्य’
भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। 
ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिये हर साल 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च देश को करना पड़ता है। 

नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime minister Narendra Modi) ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable energy) से कार्बन मुक्त ईंधन पैदा करने के लिये राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (National Hydrogen Mission) शुरू करने की औपचारिक घोषणा करने के साथ ही आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले यानी 2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की घोषणा की है। 

अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में, प्रधानमंत्री ने ऊर्जा स्वतंत्रता (Energy Independence) की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इस योजना के तहत भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन (Green Hydrogen Production) और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि देश में आज किए जा रहे सभी कार्यक्रमों में से जो भारत को एक बड़ी छलांग लगाने में मदद करेगा, वह है ग्रीन हाइड्रोजन का क्षेत्र।

गौरतलब है की भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। वहीं प्राकृतिक गैस के मामले में लगभग आधी जरूरतों के लिए इसका आयात करना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश की प्रगति और आत्मनिर्भर भारत के लिये ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी है... ऊर्जा के मामले में स्वतंत्र होने के लिये भारत को ये संकल्प लेना होगा कि आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएंगे।" 

मोदी ने कहा कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिये हर साल 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च देश को करना पड़ता है। 

मोदी ने कहा, "राष्ट्रीय ध्वज के नीचे, मैं राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा कर रहा हूं।" राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा सबसे पहले इस साल फरवरी में पेश 2021-22 के बजट में की गयी थी। 

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत को अपने आजादी के 100 साल से पहले ऊर्जा के क्षेत्र में स्वतंत्र बनने का संकल्प लेना होगा।  फिलहाल वर्ष 2050 तक कुल हाइड्रोजन का तीन चौथाई हरित यानी पर्यावरण अनुकूल किये जाने का कार्यक्रम है। इसे नवीकरणीय बिजली और इलेक्ट्रोलाइसिस से तैयार किया जायेगा।" 

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